Hamirpur, Arvind-:हमीरपुर नगर निगम के विस्तार के तहत कई पंचायतों को निगम सीमा में शामिल किए जाने के बाद इन क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार थम सी गई है। प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्टता न होने के कारण आम जनता को रोजमर्रा के कामों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि छोटे-छोटे सरकारी कार्यों के लिए भी लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों में न तो विकास योजनाएं समय पर शुरू हो पा रही हैं और न ही सामान्य प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं। नगर निगम अभी तक इन पंचायतों की पूरी जिम्मेदारी संभालने की स्थिति में नहीं है,जबकि पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारी सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं।इस दोहरी व्यवस्था के चलते न तो पंचायत और न ही नगर निगम प्रभावी ढंग से काम कर पा रहे हैं।इस स्थिति पर जिला परिषद के उपाध्यक्ष नरेश कुमार दर्ज़ी ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों को नगर निगम में शामिल करने से पहले वैकल्पिक और ठोस व्यवस्था नहीं की गई, जिसका खामियाजा अब जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जिला परिषद की ओर से कई पंचायतों के लिए विकास कार्यों हेतु फंड जारी किए गए हैं, लेकिन प्रशासनिक असमंजस के कारण उन फंडों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।
नरेश कुमार दर्ज़ी ने यह भी कहा कि पंचायत सचिवों की भारी कमी के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। एक पंचायत सचिव पर चार से पांच पंचायतों का अतिरिक्त भार होने से प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज बनवाने में लोगों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। जो काम पहले एक दिन में हो जाया करता था, अब उसके लिए चार से पांच दिन तक भटकना पड़ रहा है।उन्होंने सरकार से मांग की कि पंचायतों में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए और नगर निगम व पंचायत व्यवस्था के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि जब तक प्रशासनिक ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक न विकास कार्य आगे बढ़ पाएंगे और न ही जनता को राहत मिल सकेगी। मौजूदा हालात से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।