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डॉलर के मुकाबले रुपया कहां पहुंचा, जानें आपकी जेब पर असर

चंडीगढ़। हाल के दिनों में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप से डॉलर के मुकाबले रुपये में कुछ मजबूती जरूर देखने को मिली है, लेकिन विदेशी लेन–देन करने वालों के लिए स्थिति अब भी पूरी तरह राहत भरी नहीं है। विदेश में पढ़ाई, वीजा फीस, यात्रा, गैजेट्स या किसी भी डॉलर आधारित भुगतान की योजना बना रहे लोगों को रुपये की चाल पर खास नजर रखनी होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 4.1 से 4.3 प्रतिशत तक कमजोर हो चुका है। दिसंबर के अंत तक रुपये के 90 प्रति डॉलर के आसपास स्थिर रहने का अनुमान है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च 2026 के अंत तक रुपया 88.50 प्रति डॉलर तक मजबूत हो सकता है।

हालिया उतार-चढ़ाव की वजह

बीते सप्ताह रुपये ने 91.10 प्रति डॉलर का रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया था। इसके बाद लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद सप्ताह के अंत में रुपया 1.3 प्रतिशत की मजबूती के साथ 89.29 के स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुधार RBI के हस्तक्षेप का नतीजा है, जिसने डॉलर में सट्टेबाजी और रुपये में शॉर्ट पोजीशन को नियंत्रित करने की कोशिश की।

बजट बनाते समय रखें ये बात

अगर आप निकट भविष्य में डॉलर में भुगतान करने वाले हैं, तो 90 रुपये प्रति डॉलर को आधार मानकर बजट बनाना समझदारी होगी। ध्यान रखें कि डॉलर-रुपये की दर में हर 1 रुपये के बदलाव से 1,000 डॉलर की लागत पर सीधे 1,000 रुपये का फर्क पड़ता है।

उदाहरण के तौर पर:

  • 500 डॉलर:
    • 88.50 पर = ₹44,250
    • 90 पर = ₹45,000
    • 91 पर = ₹45,500
  • 2,000 डॉलर: ₹1.77 लाख से ₹1.82 लाख
  • 10,000 डॉलर: ₹8.85 लाख से ₹9.10 लाख

इस तरह रुपये की अस्थिरता को अपने खर्च के अनुमान में शामिल करना जरूरी हो जाता है।

बैंकों के अनुमान अलग–अलग

रुपये की भविष्य की चाल को लेकर बैंकों के अनुमान भी भिन्न हैं।

  • स्टैंडर्ड चार्टर्ड: दिसंबर तक 90, मार्च तक 89.5
  • IDFC फर्स्ट बैंक: दिसंबर 89.50–90, मार्च 88.5
  • CR फॉरेक्स: दिसंबर 89.80–90.20, मार्च 88.80–89.20
  • RBL बैंक: दिसंबर 91, मार्च 92–93
  • बैंक ऑफ बड़ौदा: दिसंबर 89.59, मार्च 90–91

इन अनुमानों से साफ है कि जनवरी–फरवरी में भुगतान करने वालों और मार्च में भुगतान करने वालों की रणनीति अलग हो सकती है।

RBI के हस्तक्षेप के बावजूद जोखिम बरकरार

विशेषज्ञों का कहना है कि RBI यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि वह रुपये की एकतरफा गिरावट नहीं चाहता और डॉलर बेचकर बाजार में अस्थिरता को कम करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, हस्तक्षेप की भी अपनी सीमाएं हैं। फॉरवर्ड और एनडीएफ बाजार में RBI की पोजीशन अधिक होने से उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है।

फॉरवर्ड मार्केट के आंकड़ों के अनुसार, जून से अक्टूबर के बीच RBI ने करीब 30 अरब डॉलर का हस्तक्षेप किया है। अक्टूबर में रुपये को 88.80 के नीचे फिसलने से रोकने के लिए लगातार डॉलर की आपूर्ति की गई।

Karuna

infosummerexpress@gmail.com

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