चीन | सोशल मीडिया पर हाल ही में चीन के कथित ‘नीडल रेन बम’ को लेकर सनसनीखेज दावे वायरल हो रहे हैं। दावा किया गया है कि यह हथियार जमीन के नीचे छिपे सैनिकों, बंकरों और खाइयों में मौजूद दुश्मनों को भी नष्ट कर सकता है। हालांकि, किसी भी आधिकारिक या विश्वसनीय सैन्य स्रोत ने इस हथियार की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञ इसे मनोवैज्ञानिक युद्ध और रणनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश मानते हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘नीडल रेन बम’ का अस्तित्व आधिकारिक सैन्य दस्तावेज़ों में दर्ज नहीं है। चीनी सेना (PLA) ने न तो इसका खुलासा किया है और न ही इसके तकनीकी विवरण साझा किए हैं। Jane’s Defence, SIPRI, IISS और संयुक्त राष्ट्र हथियार रजिस्टर जैसी विश्वसनीय संस्थाओं में भी इस हथियार का कोई उल्लेख नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह दावा पुराने क्लस्टर म्यूनिशन और फ्लेचेट हथियारों पर आधारित है, जिन्हें वियतनाम युद्ध और सीमित प्रयोगों में देखा गया था। लेकिन ये हथियार आज के आधुनिक युद्ध में प्रभावी नहीं माने जाते और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रतिबंधित हैं।
असली खतरा हथियार का नहीं, बल्कि अफवाह और डिजिटल डर फैलाने का है। भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे भ्रामक दावों का उद्देश्य केवल रणनीतिक भ्रम फैलाना और विरोधियों में डर पैदा करना है। भारत को इसके बजाय तकनीकी क्षमता, सैटेलाइट निगरानी, मिसाइल डिफेंस और सैनिक तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
इसलिए ‘नीडल रेन बम’ के कथित दावे को सोशल मीडिया आधारित अफवाह माना जा रहा है और इसका वास्तविक अस्तित्व कोई प्रमाणित स्रोत नहीं दर्शाता।