चंडीगढ़ | हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने वर्ष 2026 के बजट की औपचारिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। वित्त मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री फरवरी 2026 में सरकार का दूसरा बजट पेश कर सकते हैं। इस बार बजट को अधिक समावेशी और जनहितैषी बनाने के लिए उद्योगपतियों, किसानों, खिलाड़ियों, व्यापारियों, महिलाओं और आम नागरिकों सहित सभी वर्गों से सुझाव लेने की योजना बनाई गई है।
मुख्यमंत्री की पहल पर जनवरी माह के दौरान राज्यभर में बजट से जुड़ी बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में सांसदों, विधायकों के साथ-साथ भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों की राय भी ली जाएगी, ताकि विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों को बजट में स्थान मिल सके।
नए साल के पहले दिन मुख्यमंत्री ने एक जनवरी को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक भी बुलाई है, जिसका एजेंडा तैयार किया जा रहा है। इसी दिन हरियाणा आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री के सम्मान में दोपहर भोज का आयोजन होगा, जिसमें सभी आईएएस अधिकारी और राज्य सरकार के मंत्री शामिल होंगे।
सूत्रों के अनुसार जनवरी में ही बोर्ड एवं निगमों के चेयरमैनों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है और चरणबद्ध तरीके से इनकी घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही हरियाणा भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान भी जनवरी में संभव है।
मुख्यमंत्री स्वयं फील्ड में उतरकर प्री-बजट बैठकों की अगुवाई करेंगे। गौरतलब है कि वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने 2.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रस्तावित किया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.7 प्रतिशत अधिक था। राज्य को भविष्य की आर्थिक, तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘फ्यूचर डिपार्टमेंट’ की स्थापना की गई है। वहीं लाडो लक्ष्मी योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, हालांकि यह राशि अब तक खर्च नहीं हो सकी है।
सोमवार को पानीपत, सोनीपत और गुरुग्राम में उद्योगपतियों के साथ प्रस्तावित प्री-बजट बैठकों को खराब मौसम के कारण स्थगित करना पड़ा। मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर की उड़ान संभव नहीं हो सकी, जिसके चलते बैठकों का नया कार्यक्रम जल्द जारी किया जाएगा।
पहले चरण में मुख्यमंत्री उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। इसके बाद प्रगतिशील किसानों के साथ बैठक कर उनकी अपेक्षाओं, मौजूदा योजनाओं की प्रभावशीलता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर विपक्ष के सांसदों और विधायकों से भी बजट को लेकर सुझाव आमंत्रित किए जा सकते हैं।