Shimla, 3 January-:शिमला से एक गंभीर साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी से 1.18 करोड़ रुपये ठग लिए। यह ठगी तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की गई, जिसका कानून में कोई अस्तित्व नहीं है। मामले को लेकर शिमला साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है।
पीड़ित के अनुसार, उसे एक वीडियो कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। ठग ने कहा कि पीड़ित का नाम मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी और बैंक खातों के दुरुपयोग जैसे गंभीर मामलों में सामने आया है। आरोपी ने तत्काल गिरफ्तारी, बैंक खाते फ्रीज होने और सामाजिक बदनामी की धमकी दी। भय का माहौल बनाकर ठगों ने दावा किया कि पीड़ित को “डिजिटल निगरानी” में रखा गया है और वह किसी भी परिजन, मित्र या अन्य सरकारी एजेंसी से संपर्क नहीं कर सकता।लगातार दबाव और डर के चलते पीड़ित मानसिक रूप से टूट गया। ठगों ने उसे कथित जांच प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए रकम “सरकारी खातों” में ट्रांसफर करनी होगी। भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस मिल जाएंगे। पीड़ित ने कई किश्तों में कुल 1.18 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में पता चला कि जिन खातों में पैसा भेजा गया, वे म्यूल यानी फर्जी खाते थे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जाता है।
इस मामले पर साइबर क्राइम के पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई भी कानूनी प्रावधान नहीं है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि ऐसी किसी भी कॉल से घबराएं नहीं, तुरंत कॉल काटें और किसी दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। साथ ही ओटीपी, बैंक विवरण, आधार और पैन जैसी संवेदनशील जानकारी साझा न करने और तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी गई है।