Shimla, 5 January-:मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश सरकार शिक्षा नीति में व्यापक बदलाव करने जा रही है। सीबीएसई के अंतर्गत लाए जा रहे सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी और गणित विषय के लिए विशेष प्रशिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की किसी भी पंचायत में किसी भी बीपीएल परिवार का नाम सूची से नहीं हटाया गया है। सरकार केवल सर्वे के माध्यम से गरीब परिवारों का डाटा एकत्र कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन-से पात्र परिवार अब तक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए हैं।नादौन दौरे के दौरान भाजपा नेताओं द्वारा 80 प्रतिशत परिवारों के नाम बीपीएल सूची से हटाने के लगाए गए आरोपों को मुख्यमंत्री ने भ्रामक बताया। अपने गांव भंवड़ों में उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल प्रथम चरण का अध्ययन किया जा रहा है। एसडीएम और बीडीओ के माध्यम से बीपीएल परिवारों का सत्यापन हो रहा है, लेकिन किसी भी परिवार को सूची से हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले पंचायतों की मांग पर विकास कार्य किए जाते थे, लेकिन अब यह तय किया जा रहा है कि किस पंचायत में कौन-सा कार्य होगा। इससे न तो तालाब बन पा रहे हैं और न ही रास्ते। उन्होंने भाजपा सांसदों से इस निर्णय का विरोध करने की अपील की।उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को जल्द ही जोलसप्पड़ स्थित नए भवन में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके अलावा जोलसप्पड़ में प्रस्तावित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए प्रदेश सरकार ने 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए हब एंड स्पोक मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत 1,968 क्लस्टर गठित किए गए हैं, जिनमें वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को हब बनाया गया है और उनसे 7 से 8 प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च विद्यालय जोड़े गए हैं।
इस व्यवस्था के तहत सभी स्कूल संसाधनों का साझा उपयोग करेंगे, जिससे छोटे और दूरदराज क्षेत्रों के स्कूलों के विद्यार्थियों को आईसीटी लैब, विज्ञान प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और खेल सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इससे ग्रामीण और शहरी स्कूलों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता का अंतर कम होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार के सत्ता में आने पर कई स्कूलों में नामांकन शून्य या बहुत कम था। पिछली सरकार द्वारा बिना पर्याप्त योजना और बजट के बड़ी संख्या में स्कूल खोले गए थे। समीक्षा के बाद 770 शून्य नामांकन वाले स्कूल बंद किए गए और 532 कम नामांकन वाले स्कूलों को नजदीकी विद्यालयों में विलय किया