नई दिल्ली। तमिलनाडु में कार्तिकई दीपम से जुड़े विवाद पर मद्रास हाईकोर्ट ने अहम आदेश सुनाया है। दो जजों की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर दीपम जलाने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस धार्मिक परंपरा को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
जस्टिस जी. जयाचंद्रन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की पीठ ने कहा कि तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी एक संरक्षित स्थल है, इसलिए यहां कानून और नियमों का सख्ती से पालन किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि दोनों समुदायों के बीच संवाद स्थापित कर सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए।
सख्त शर्तों के साथ अनुमति
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि पहाड़ी पर दीपम जलाया जा सकता है, लेकिन आम जनता को वहां जाने की इजाजत नहीं होगी। पहाड़ी पर किसे प्रवेश मिलेगा, इसका निर्णय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) करेगा, ताकि स्थल की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
यह मामला हिंदू तमिल पार्टी के नेता रामा रविकुमार की याचिका पर सुनवाई के बाद सामने आया। उन्होंने पहाड़ी पर स्थित स्तंभ पर कार्तिकई दीपम जलाने की अनुमति की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
पहले भी हुआ था विवाद
गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2025 को जस्टिस जी.आर. स्वामिनाथन ने भी इसी तरह के मामले में दीपक जलाने की अनुमति दी थी, लेकिन उस समय स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताते हुए आदेश लागू नहीं किया था। इस फैसले का तमिलनाडु सरकार और कुछ राजनीतिक दलों ने विरोध भी किया था।
बीजेपी ने बताया ऐतिहासिक निर्णय
तिरुपरंकुंद्रम की यह पहाड़ी धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां एक ओर दरगाह मौजूद है, वहीं सदियों से कार्तिकई दीपम जलाने की परंपरा चली आ रही है। मद्रास हाईकोर्ट के ताजा आदेश पर बीजेपी ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे तमिलनाडु में हिंदू परंपराओं के लिए बड़ी जीत बताया है।