रूस | 2026 की शुरुआत में रूस और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। हाल ही में रूस ने अटलांटिक महासागर में अपनी परमाणु पनडुब्बी BS-329 बेलगोरोद को तैनात किया, जिसे दुनिया “समंदर का यमराज” कहती है। यह पनडुब्बी 100 मेगाटन तक के परमाणु पेलोड के साथ अंडरवॉटर न्यूक्लियर ड्रोन पोसाइडन लॉन्च कर सकती है और समुद्र के नीचे 500 मीटर तक रेडियोधर्मी सुनामी पैदा करने में सक्षम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अमेरिका के तटीय शहरों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और रेडिएशन के कारण वहां रहने योग्य वातावरण लंबे समय तक नहीं रहेगा।
वहीं, अमेरिका ने रूस की इस धमकी के जवाब में अपना संवेदनशील कमांड एयरक्राफ्ट Boeing E-4B नाइटवॉच सक्रिय किया, जिसे आमतौर पर ‘डूम्सडे प्लेन’ कहा जाता है। यह विमान परमाणु युद्ध के दौरान कमांड सेंटर का काम करता है और सीधे न्यूक्लियर पनडुब्बियों, बॉम्बर्स और ICBM मिसाइल सिस्टम से संपर्क में रहता है।
इस पूरे विवाद की जड़ अमेरिका द्वारा रूसी तेल टैंकर Bella-1 और M/T सोफिया के कब्जे से जुड़ी है। ये टैंकर वेनेजुएला से चीन को तेल सप्लाई कर रहे थे। अमेरिकी कार्रवाई ने रूस और चीन दोनों को झटका दिया है। रूस ने अपने तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अटलांटिक महासागर में परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत तैनात किए हैं।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जुबानी और सैन्य तनाव जारी रहा, तो यह टकराव परमाणु युद्ध में बदल सकता है। दुनिया की नजरें अब अमेरिका-रूस के इन हालात पर टिकी हैं, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ रही हैं।