Mandi, Dharamveer-: राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित स्वयं सहायता समूह महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। सुंदरनगर शहर की रहने वाली भीमा देवी इसका जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने स्वरोजगार को विस्तार दिया, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत पहचान भी बनाई।
भीमा देवी पहले घर पर सीमित स्तर पर सिलाई का काम करती थीं। काम नियमित न मिलने के कारण उनकी आमदनी बहुत कम थी, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन हो जाता था। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत गठित राधे मुकुंद स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का अवसर मिला। समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया।भीमा देवी ने बताया कि शुरुआत में समूह को सरकार की ओर से 10 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड प्राप्त हुआ, जिससे छोटे स्तर पर कार्य को गति मिली। बाद में समूह को 8 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। समूह में कुल 8 सदस्य हैं और प्रत्येक सदस्य को एक-एक लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई गई। इस धनराशि से भीमा देवी ने नई सिलाई मशीनें और जरूरी उपकरण खरीदे, जिससे उनका काम तेजी से बढ़ने लगा।
आज भीमा देवी सिलाई कार्य से हर माह लगभग 25 से 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। वह इस आमदनी से न केवल अपने परिवार की आर्थिक सहायता कर रही हैं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन भी कर रही हैं। खास बात यह है कि उनके पास कई युवतियां और महिलाएं सिलाई का प्रशिक्षण लेने आती हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये महिलाएं भी आगे चलकर अपना स्वयं का रोजगार शुरू कर रही हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।भीमा देवी ने बताया कि समूह की शुरुआत 500 रुपये प्रतिमाह की बचत से हुई थी, जिसे अब बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है। वर्तमान में समूह की कुल बचत लगभग 2 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। इससे सभी सदस्यों की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हुई है।
उन्होंने अन्य महिलाओं से अपील की कि यदि वे अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं तो स्वयं सहायता समूह से जुड़ना एक सशक्त और प्रभावी माध्यम है। भीमा देवी ने महिलाओं के उत्थान के लिए चलाई जा रही केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के लिए आभार जताया और कहा कि इन योजनाओं ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा दी है।गौरतलब है कि नगर परिषद सुंदरनगर क्षेत्र में वर्ष 2016 से अब तक 114 स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं। इन समूहों को सरकार की ओर से लगभग 3.50 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इनमें से 41 समूहों की क्रेडिट लिंकेज हो चुकी है। इसके अतिरिक्त 111 लाभार्थियों को 2-2 लाख रुपये का ऋण 7 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया गया है। वहीं 112 स्वयं सहायता समूहों को 10-10 हजार रुपये और 7 एरिया लेवल फेडरेशनों को 50-50 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध करवाया गया है।