Shimla, 13 January-:हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी में शामिल पाए गए पुलिस कर्मियों के खिलाफ सरकार ने अब कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद यह तय किया गया है कि ऐसे सभी पुलिसकर्मियों की संपत्ति और वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच की जाएगी। उनके बैंक खाते, निवेश और अन्य आर्थिक स्रोतों की पड़ताल कर यह पता लगाया जाएगा कि उन्होंने अवैध नशा कारोबार से कितनी कमाई की है।
जांच एजेंसियां पुलिस कर्मियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की भी समीक्षा करेंगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि वे किन लोगों के संपर्क में थे और नशा तस्करी के नेटवर्क में उनकी भूमिका कितनी गंभीर थी।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल पुलिस कर्मियों तक सीमित नहीं होगी। उनके संभावित सहयोगियों और संपर्कों तक दायरा बढ़ाया जाएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि इस अवैध धंधे को किसके संरक्षण या समर्थन के तहत चलाया गया।उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति शामिल पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश सरकार की नशे के खिलाफ नीति “जीरो टॉलरेंस” की है। पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा दिलाना नहीं है, बल्कि पूरे नशा तस्करी के नेटवर्क को खत्म करना है, ताकि हिमाचल प्रदेश को नशामुक्त बनाया जा सके। यह कदम प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और युवा पीढ़ी को सुरक्षित रखने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।