पटियाला। दुष्कर्म और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामलों में आरोपित आम आदमी पार्टी (AAP) के सनौर विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने खुद को भगोड़ा घोषित किए जाने के आदेश को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। विधायक की ओर से दाखिल याचिका में ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई है, जिसके तहत उन्हें फरार घोषित किया गया था।
याचिका में विधायक ने हाईकोर्ट से यह भी आग्रह किया है कि भगोड़ा घोषित किए जाने के आदेश के आधार पर उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। उल्लेखनीय है कि पटियाला की स्थानीय अदालत ने 20 दिसंबर 2025 को लगातार पेश न होने के चलते हरमीत सिंह पठानमाजरा को भगोड़ा घोषित किया था। फिलहाल विधायक फरार हैं और जांच एजेंसियों को आशंका है कि वह ऑस्ट्रेलिया में छिपे हो सकते हैं।
ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में पुलिस को निर्देश दिए थे कि वह विधायक की चल-अचल संपत्तियों का पूरा विवरण 31 जनवरी तक अदालत में पेश करे। वहीं, विधायक ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
इस मामले की शुरुआत अगस्त 2022 में हुई थी, जब एक महिला ने विधायक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस ने उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। करीब तीन साल बाद पुलिस ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सितंबर 2025 में हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म), 420 (धोखाधड़ी) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत एफआईआर दर्ज की।
पीड़िता का आरोप है कि विधायक ने शादी का झूठा वादा कर उसके साथ दुष्कर्म किया, निजी वीडियो बनाए और बाद में उन्हें वायरल करने की धमकी देकर दबाव बनाया। जुलाई 2024 में भी उसे कथित रूप से धमकी भरी कॉल मिली थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने विधायक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सितंबर 2025 में गिरफ्तारी के प्रयास के दौरान करनाल के डबरी गांव में हालात तनावपूर्ण हो गए थे, जहां समर्थकों द्वारा पथराव और गोलीबारी की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद विधायक फरार हो गए। कोर्ट के बार-बार बुलाने के बावजूद पेश न होने पर अंततः उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया और उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है।