रोहतक | हरियाणा के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस, रोहतक में जल्द ही बिना चीर-फाड़ पोस्टमार्टम की सुविधा शुरू होने जा रही है। संस्थान में वर्चुअल ऑटोप्सी तकनीक लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिससे मौत के कारणों का पता अब कुछ ही मिनटों में लगाया जा सकेगा। उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में यह आधुनिक तकनीक पीजीआई को मिल जाएगी।
करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से लागू की जाने वाली इस तकनीक के लिए आवश्यक इमारत का निर्माण पूरा हो चुका है। फिलहाल पीजीआई में पारंपरिक तरीके से शव को चीरा लगाकर पोस्टमार्टम किया जाता है, जिसमें अधिक समय लगता है। लेकिन वर्चुअल ऑटोप्सी के जरिए बिना किसी चीर-फाड़ के डिजिटल माध्यम से मौत के कारणों की जांच संभव होगी।
डिजिटल एक्सरे और सीटी स्कैन से होगी जांच
वर्चुअल ऑटोप्सी में डिजिटल एक्सरे, सीटी स्कैन और अन्य अत्याधुनिक मशीनों की मदद से शव के अंदरूनी अंगों की गहन जांच की जाएगी। इससे गोली लगने की जगह, अंदरूनी चोट, अंगों की क्षति और मौत की वास्तविक वजह का सटीक आकलन किया जा सकेगा। इस तकनीक से पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा।
20 करोड़ से बना अत्याधुनिक शवगृह
पीजीआई में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से नया और आधुनिक शवगृह तैयार किया गया है। इस मॉडर्न मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स को पूरी तरह डिजिटल सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। यह परियोजना दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में शवगृह की इमारत का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे चरण में वर्चुअल ऑटोप्सी से जुड़ी मशीनों की स्थापना की जाएगी।
पीजीआई प्रशासन ने मॉर्चरी में पहले से ही एक अलग स्थान चिह्नित कर रखा है, जहां आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे।
प्रदेश में पहली बार लागू होगी तकनीक
पीजीआई के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. वरुण ने बताया कि हरियाणा में यह तकनीक पहली बार शुरू की जा रही है। फिलहाल राज्य में कहीं भी वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। देश में केवल एक परियोजना एम्स में आईसीएमआर के सहयोग से चल रही है। इस तकनीक को लेकर देशभर में शोध और चर्चा जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, वर्चुअल ऑटोप्सी न केवल पोस्टमार्टम प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएगी, बल्कि मेडिकल रिसर्च और फॉरेंसिक जांच को भी नई दिशा देगी। आवश्यक मशीनों की खरीद प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।