सोनीपत। हरियाणा सरकार द्वारा भूमि पंजीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के उद्देश्य से लागू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। सोनीपत में सामने आए एक मामले ने इस डिजिटल व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है, जहां महज 30 वर्ग गज के प्लॉट की रजिस्ट्री में 576 पन्नों का रिकॉर्ड तैयार हो गया। इस घटना के बाद आम लोगों से लेकर राजस्व विभाग तक में चर्चा तेज हो गई है।
सरकार ने पेपरलेस रजिस्ट्री को समय और कागज की बचत के लिए लागू किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था उलझनों का कारण बनती नजर आ रही है। पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड, डेटा सिंक्रोनाइजेशन और तकनीकी त्रुटियों के चलते रजिस्ट्री प्रक्रिया लंबी और जटिल हो गई है। कई मामलों में सिस्टम बार-बार एक ही दस्तावेज को जोड़ देता है, जिससे फाइल का आकार असामान्य रूप से बढ़ रहा है।
तहसील कार्यालयों में काम कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि नए सॉफ्टवेयर की पूरी जानकारी और तकनीकी प्रशिक्षण के अभाव में उन्हें भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। वहीं रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और कई बार बिना काम के लौटना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया तो पेपरलेस रजिस्ट्री का उद्देश्य ही विफल हो सकता है। सरकार को चाहिए कि पोर्टल की तकनीकी समीक्षा कराई जाए और कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि डिजिटल व्यवस्था वास्तव में आम जनता के लिए लाभकारी बन सके।
फिलहाल, सोनीपत का यह मामला पेपरलेस रजिस्ट्री सिस्टम की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है और सुधार की तत्काल जरूरत को रेखांकित करता है।