लंदन। चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले ने अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में नई तल्खी पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से “घोर मूर्खता” करार देते हुए कड़ा हमला बोला है। ट्रंप की टिप्पणी के बाद ब्रिटिश सरकार असहज स्थिति में आ गई है और उसे अपने फैसले का सार्वजनिक रूप से बचाव करना पड़ रहा है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह हैरान करने वाला है कि ब्रिटेन जैसे नाटो सहयोगी देश डिएगो गार्सिया द्वीप को मॉरीशस को सौंपने की योजना बना रहा है, जहां अमेरिका का बेहद अहम सैन्य अड्डा स्थित है। उन्होंने दावा किया कि इस कदम को चीन और रूस जैसे देश कमजोरी के संकेत के तौर पर देख सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि यही कारण है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
ट्रंप की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अमेरिका के साथ रिश्तों में आई तल्खी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले स्टार्मर ने ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के बयानों को “पूरी तरह गलत” बताया था, हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच मई 2025 में हुए समझौते के तहत लगभग 200 वर्षों के ब्रिटिश नियंत्रण के बाद चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपी जाएगी। हालांकि, रणनीतिक रूप से अहम डिएगो गार्सिया द्वीप, जहां संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डा है, उसे ब्रिटेन कम से कम 99 वर्षों के लिए पट्टे पर वापस लेगा।
ब्रिटिश सरकार का कहना है कि यह समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है। कैबिनेट मंत्री डैरेन जोन्स ने दावा किया कि इससे अगले 100 वर्षों तक डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे का सुरक्षित और स्थिर संचालन सुनिश्चित होगा। सरकार ने दोहराया कि वह सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी और समझौते में दुश्मन देशों से निपटने के लिए मजबूत प्रावधान शामिल हैं।
हालांकि, विपक्षी दल इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि चागोस द्वीपसमूह छोड़ने से चीन और रूस के प्रभाव बढ़ने का खतरा है। कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैडेनोच ने कहा कि ट्रंप की चेतावनी सही है और यह नीति ब्रिटेन की सुरक्षा व संप्रभुता को कमजोर करती है। यह मुद्दा संसद के ऊपरी सदन में भी तीखी बहस का कारण बना हुआ है।
अमेरिका के अनुसार, डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे पर करीब 2,500 सैनिक तैनात हैं, जिनमें अधिकांश अमेरिकी हैं। यह अड्डा मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में सैन्य अभियानों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।