नई दिल्ली | हरियाणा में बीते 11 वर्षों से कांग्रेस संगठन को मजबूत नहीं किया जा सका है। इस दौरान पार्टी कई चुनाव हार चुकी है, लेकिन जिलों और बूथ स्तर पर संगठनात्मक ढांचा मजबूत नहीं बन पाया। अब राहुल गांधी ने हरियाणा कांग्रेस के पुनर्गठन को अपनी प्राथमिकता बना लिया है और गुटबाजी पर सख्त रुख अपनाते हुए संगठन निर्माण की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
जिला अध्यक्षों के चयन में किसी दबाव की नहीं होगी जगह
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने हाल ही में चंडीगढ़ स्थित पार्टी प्रदेश कार्यालय में राज्य और केंद्रीय संगठन पर्यवेक्षकों के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला अध्यक्षों के पैनल तैयार करने में किसी भी वरिष्ठ नेता की सिफारिश या दबाव को नहीं माना जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि यदि कोई नेता दबाव बनाए तो उसकी जानकारी आलाकमान को दी जाए।
आज दिल्ली में फिर होगी समीक्षा बैठक
शुक्रवार को राहुल गांधी दिल्ली में केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें हर जिले से जुड़ी चुनौतियों, गुटबाजी, कार्यकर्ताओं के जोश और नेताओं की अनुशासनहीनता जैसे विषयों पर चर्चा होगी। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि पर्यवेक्षकों पर किसी प्रकार का दबाव डाला गया या नहीं।
4 जून को चंडीगढ़ में की थी मैराथन बैठक
गौरतलब है कि 4 जून को राहुल गांधी चंडीगढ़ पहुंचे थे, जहां उन्होंने कांग्रेस कार्यालय में तीन घंटे तक बैठकें की थीं। इसमें AICC और PCC के वरिष्ठ पर्यवेक्षक शामिल हुए थे। उन्होंने साफ किया था कि गुटबाजी पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और जिलाध्यक्षों का चयन मेरिट व कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर होगा।
30 जून तक तय हो जाएगा जिलाध्यक्षों का नाम
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने निर्देश दिया था कि 30 जून तक हरियाणा के 22 जिलों में जिलाध्यक्षों के नाम तय किए जाएं। फिलहाल पैनल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राहुल ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन के लिए सिर्फ पद नहीं, प्रतिबद्धता और ईमानदारी चाहिए — सिफारिश और गुटबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।