नूंह | नूंह जिले में 17 लाख की आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी सामने आई है। जिले में सरकारी स्वास्थ्य विभाग के पास केवल 25 एंबुलेंस वाहन हैं, जिनमें से तीन वाहन पुराने और अपर्याप्त स्थिति में हैं। इन संसाधनों के अभाव में समय पर आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई आती है।
जानकारी के अनुसार, 25 एंबुलेंस में से पांच मांडीखेड़ा, एक नलहड़ और बाकी जिले की सीएचसी व पीएचसी केंद्रों पर तैनात हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में इन वाहनों की कमी के कारण कई बार दुर्घटना या गंभीर रोगियों को इलाज के लिए समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। इसके चलते लोग निजी एंबुलेंस का सहारा लेने को मजबूर हैं, जिससे उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा, सामान्य अस्पताल नूंह और नलहड़ मेडिकल कॉलेज के अलावा जिले में 17 पीएचसी और पांच सीएचसी हैं। इन सभी केंद्रों को सेवाएं प्रदान करने के लिए सरकारी एंबुलेंस का यह सीमित नेटवर्क ही मौजूद है। विभाग के पास चार एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस भी हैं, जिनमें तीन मांडीखेड़ा और एक नलहड़ में तैनात है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी एंबुलेंस में ऑक्सीजन वेंटीलेटर की सुविधा है और गंभीर मरीजों को आगे रेफर करते समय फार्मासिस्ट के साथ भेजा जाता है। विभाग ने हाल ही में पांच नई एंबुलेंस की मांग की है, जिनमें से दो पीएचसी बिछोर और जोरासी को दी जाएंगी। इसके अलावा तीन पुरानी एंबुलेंस को बदला जाएगा।
निजी अस्पताल या हायर सेंटर रेफरल के समय सरकारी एंबुलेंस न मिलने के कारण मरीजों को निजी एंबुलेंस का खर्च उठाना पड़ता है। यह समस्या विशेष रूप से नलहड़ मेडिकल कॉलेज से देखने को मिल रही है। स्थानीय नागरिक इस स्थिति को स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की विफलता का गंभीर संकेत मान रहे हैं।