पंचकूला। हरियाणा में नियम 134ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने वाले निजी स्कूलों को अब फीस प्रतिपूर्ति से पहले अपनी मान्यता की जांच से गुजरना होगा। शिक्षा विभाग स्पष्ट कर चुका है कि जिस कक्षा तक स्कूल को मान्यता प्राप्त होगी, उसी कक्षा तक की फीस का भुगतान किया जाएगा। मान्यता से ऊपर की कक्षाओं के लिए दावा की गई राशि रोकी जाएगी।
मौलिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (डीईईओ) को निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को यह सत्यापित करना होगा कि जिन कक्षाओं के लिए निजी स्कूलों ने फीस प्रतिपूर्ति का दावा किया है, वे वास्तव में उन कक्षाओं के लिए मान्यता प्राप्त हैं या नहीं।
इधर, निजी स्कूल संघ ने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात कर स्कूल सोसायटियों पर लगाए गए जुर्मानों को माफ करने की मांग की है। संघ ने ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि प्रदेश के करीब 2150 निजी स्कूल ईडब्ल्यूएस श्रेणी के विद्यार्थियों को पढ़ाने के एवज में लंबे समय से बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
छठी से 12वीं के दाखिलों का शेड्यूल जारी
उधर, जींद में चिराग योजना के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के दाखिलों को लेकर शेड्यूल जारी कर दिया गया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजा है।
जारी निर्देशों के अनुसार, मान्यता प्राप्त निजी स्कूल चिराग योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों के दाखिले के लिए अपनी सहमति 29 जनवरी से 15 फरवरी तक विभागीय वेबसाइट पर दर्ज कर सकेंगे। कक्षा वार सीटों का विवरण विभाग की वेबसाइट या पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं, संबंधित स्कूल 10 मार्च से अपने नोटिस बोर्ड पर खाली सीटों की जानकारी सार्वजनिक करेंगे।