वॉशिंगटन। अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने ईरान में विरोध प्रदर्शनों के हिंसक दमन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए शुक्रवार को ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पर प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिका का आरोप है कि मोमेनी ने देशभर में हुए उन प्रदर्शनों को कुचलने में अहम भूमिका निभाई, जिनमें तेहरान की धार्मिक नेतृत्व वाली सरकार को खुली चुनौती दी गई थी।
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, एस्कंदर मोमेनी उन कानून-प्रवर्तन और सुरक्षा बलों की निगरानी कर रहे थे, जिन पर हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मौत का आरोप है। ईरान में आर्थिक संकट के चलते दिसंबर के उत्तरार्द्ध में शुरू हुए ये प्रदर्शन धीरे-धीरे इस्लामी गणराज्य के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती बन गए, जिसके बाद सरकार ने व्यापक दमनात्मक कार्रवाई शुरू की।
मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 6,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, ईरानी अधिकारी और सरकारी मीडिया लगातार प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादी’ करार देते रहे हैं।
इससे पहले गुरुवार को यूरोपीय संघ ने भी मोमेनी सहित ईरान की न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य उच्च पदस्थ अफसरों पर प्रतिबंध लगाए थे। यूरोपीय संघ ने स्पष्ट किया कि ये सभी अधिकारी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के हिंसक दमन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं व मानवाधिकार रक्षकों की मनमानी गिरफ्तारियों में शामिल रहे हैं।
इसके साथ ही यूरोपीय संघ ने ईरान के अर्धसैनिक बल ‘रिवॉल्यूशनरी गार्ड’ को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने पर सहमति जताई है। हालांकि इसे प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन इससे तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ने की संभावना है।
अमेरिका द्वारा लगाए गए ताजा प्रतिबंधों में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव का नाम भी शामिल है। अमेरिकी वित्त विभाग का आरोप है कि वे उन शुरुआती अधिकारियों में से थे, जिन्होंने ईरानी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा भड़काने का आह्वान किया था। अमेरिका और यूरोपीय संघ की इन कार्रवाइयों को ईरान के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के रूप में देखा जा रहा है।