हिसार। केंद्रीय बजट में घोषणा के बाद हरियाणा की प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी को देश के 15 ‘आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों’ में शामिल किया गया है। यह निर्णय सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े केंद्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से लिया गया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को आम लोगों से जोड़ने के लिए चयनित पुरातात्विक स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी नीति के तहत राखीगढ़ी को संरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। परिसर में पाथ-वे, सूचना तंत्र और प्रशिक्षित गाइड की व्यवस्था की जाएगी, ताकि आने वाले पर्यटक सभ्यता के अवशेषों और उनके ऐतिहासिक महत्व को आसानी से समझ सकें।
बजट से पहले भी राखीगढ़ी की महत्वता को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2025-26 में इसे वैश्विक धरोहर केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यहां खुदाई और संरक्षण कार्यों को गति दी थी। अब बजट 2026-27 की घोषणा के साथ राखीगढ़ी को एक नई राष्ट्रीय पहचान मिल गई है।
पर्यटन दृष्टिकोण से, राखीगढ़ी में अब केवल खुदाई स्थल ही नहीं, बल्कि सुनियोजित टूरिज्म ढांचा विकसित किया जाएगा। परिसर में बने पाथ-वे से पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी। प्रशिक्षित गाइड सभ्यता, खुदाई और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी देंगे। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए प्राचीन जीवन-शैली को समझाने का प्रयास किया जाएगा।
राखीगढ़ी को हड़प्पाकालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट माना जाता है। यहां अब तक हजारों साल पुराने मानव कंकाल, मकानों की दीवारें, कच्ची ईंटें, तांबा, मनके, मोहरें और जल निकासी के प्रमाण मिल चुके हैं। ये अवशेष नगर की सुव्यवस्थित शहरी योजना और तकनीकी समझ का संकेत देते हैं।
इतिहासकारों के अनुसार, राखीगढ़ी प्राचीन सरस्वती नदी प्रणाली के किनारे बसा था। माना जाता है कि नदी की सहायक धाराओं के सूखने के बाद इस नगर का पतन हुआ। खुदाई में मिले सूखे नदी-तल, कुएं और जल संरचनाएं इस सिद्धांत को पुष्ट करती हैं।