नई दिल्ली | कीमती धातुओं के बाजार में जोरदार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे सोना बीते एक दशक की सबसे बड़ी गिरावट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। लंबे समय तक रिकॉर्ड ऊंचाई पर रहने के बाद अब बुलियन बाजार में तीखा करेक्शन देखने को मिल रहा है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में स्पॉट गोल्ड की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं चांदी की कीमतों में भी जोरदार टूट देखने को मिली। एक समय चांदी 12 प्रतिशत तक फिसल गई थी और बाद में यह 80 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखी। पिछले सत्र में चांदी ने अब तक की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट दर्ज की, जिससे बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट केवल मुनाफावसूली तक सीमित नहीं है। जेपी मॉर्गन चेस के पूर्व प्रीशियस मेटल्स ट्रेडर और स्वतंत्र विश्लेषक रॉबर्ट गॉटलिब का कहना है कि बुलियन बाजार में तेजी के दौरान निवेश काफी भीड़भाड़ वाला हो गया था। अब यह देखना अहम होगा कि कीमतों को किस स्तर पर मजबूती मिलती है।
बीते एक साल में सोना और चांदी भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक मुद्राओं में कमजोरी और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंचे थे। जनवरी में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से कीमतें और ऊपर चली गई थीं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती अस्थिरता और ऑप्शन ट्रेडिंग में रिकॉर्ड खरीदारी ने पहले ही बड़े करेक्शन के संकेत दे दिए थे। अब उसी का असर बाजार में साफ दिखाई दे रहा है।