नई दिल्ली | सराफा बाजार में पिछले लंबे समय से जारी तेजी अचानक शुक्रवार को थम गई, और सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। 30 जनवरी को इस मंदी ने निवेशकों को चौंका दिया, क्योंकि यह दशकों में पहली बार ऐसा नजारा है। सिर्फ सोने ही नहीं, बल्कि चांदी और प्लैटिनम की कीमतें भी एक साथ गिर गईं।
जनवरी के आखिरी शुक्रवार को सोने की कीमतें लगभग 12 प्रतिशत टूट गईं, जबकि चांदी के दाम 26 प्रतिशत तक फिसले और प्लैटिनम की कीमत 18 प्रतिशत कम हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक साल में सोने के दाम लगभग 60 प्रतिशत तक बढ़ चुके थे। उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद बाजार में बनी अनिश्चितता और मुनाफावसूली ने इस ऐतिहासिक गिरावट को जन्म दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार इस उथल-पुथल के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। अमेरिका में फेडरल रिजर्व का नया प्रमुख केविन वार्श बनने की खबर, ईरान के साथ बातचीत के संकेत और अमेरिकी सरकारी कामकाज (Shutdown) के खतरे में कमी ने निवेशकों का रुख बदला। डॉलर की मजबूती और अन्य मुद्राओं में कमजोरी ने भी सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव डाला।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि सोना और चांदी ‘ओवरबॉट’ यानी अत्यधिक खरीदी की स्थिति में पहुंच गए थे। कीमतों के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने पर बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। हालांकि, पूरे महीने के हिसाब से देखें तो सोना और चांदी अब भी पिछले महीने की तुलना में बढ़त पर ही बने हुए हैं।
इतिहास की बात करें तो साल 1980 में चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया था। उस समय हंट ब्रदर्स द्वारा भारी मात्रा में चांदी खरीदने के कारण कीमतें आसमान छू गई थीं। नियामक हस्तक्षेप के बाद सिर्फ एक ही दिन में चांदी की कीमत 50 डॉलर से गिरकर 11 डॉलर प्रति औंस तक आ गई थी। इसके बाद 2011 में भी चांदी में तेजी और उसके बाद 30 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली थी।