गाजा | गाजा पट्टी में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा घटनाक्रम में इजराइली हमलों और गोलीबारी में कम से कम 24 फिलीस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें बच्चे, महिलाएं और एक पैरामेडिक भी शामिल हैं। फिलीस्तीनी अधिकारियों ने इन हमलों को संघर्षविराम के बाद की सबसे घातक घटनाओं में से एक बताया है।
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मृतकों में सात बच्चे शामिल हैं, जबकि 38 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। लगातार हो रही हिंसा के चलते गाजा में हालात एक बार फिर अत्यंत तनावपूर्ण बन गए हैं और युद्धविराम की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका की मध्यस्थता से हुए समझौते के तहत गाजा और मिस्र के बीच रफाह सीमा चौकी को आंशिक रूप से दोबारा खोला गया था। हालांकि, फिलीस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि बुधवार को इजराइल ने मरीजों और घायलों को रफाह के रास्ते बाहर जाने से रोक दिया, जिससे चिकित्सा सहायता की उम्मीद लगाए लोगों में निराशा फैल गई है।
इजराइली सेना ने हमले को लेकर सफाई देते हुए कहा कि उसके सैनिकों पर गोलीबारी की गई थी, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई। इजराइल का दावा है कि इस हमले में उसका एक अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुआ। वहीं, इजराइल ने यह भी कहा कि उसकी जवाबी कार्रवाई में तीन शीर्ष चरमपंथी और कुछ संदिग्ध लोग मारे गए, जो सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए थे।
इजराइल और हमास एक-दूसरे पर संघर्षविराम तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और मानवीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि गाजा में मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों को तत्काल इलाज, दवाइयों और सुरक्षित आवागमन की जरूरत है।
शिफा अस्पताल के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सलमिया ने सोशल मीडिया पर चिंता जताते हुए कहा कि गाजा में नरसंहार जैसी स्थिति बनी हुई है और लोग पूछ रहे हैं कि युद्धविराम आखिर कहां है और मध्यस्थ क्या कर रहे हैं।
गाजा में लगातार बढ़ रही मौतों के बीच स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है मानो युद्ध कभी रुका ही नहीं।