करनाल। जिले में दो अलग-अलग धान घोटालों की जांच में पुलिस की विशेष जांच टीम ने तेजी दिखाई है। मौजूदा धान सीजन में हुए लगभग 20 करोड़ रुपये के घोटाले में पुलिस ने 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। वहीं, वर्ष 2022-23 के फर्जीवाड़े की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो अब तक किसी आरोपी को पकड़ने में असफल रही।
मौजूदा सीजन के दौरान अक्टूबर-नवंबर में जिले की अलग-अलग मंडियों में धान घोटाले को अंजाम दिया गया। जांच में सामने आया कि बिना धान खरीदे ही फर्जी गेट पास काटे गए और कुल छह FIR दर्ज की गई। पुलिस ने करनाल मंडी सुपरवाइजर, आढ़ती और दो कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों में असंध हैफेड प्रबंधक प्रमोद, हैफेड प्रबंधक निसिंग दर्शन सिंह, स्टेट वेयर हाउस इंद्री के सहायक तकनीकी अधिकारी प्रदीप कुमार, DFSC निरीक्षक इंद्री और तरावड़ी, आढ़ती नरेश व देवेंद्र और दो राइस मिल मालिक शामिल हैं।
दूसरी ओर, वर्ष 2022-23 में घरौंडा मंडी में हुए फर्जीवाड़े की जांच एसीबी कर रही है। जांच में अधिकारियों और मिल मालिकों की मिलीभगत सामने आई। इसमें 2.56 करोड़ रुपये के फर्जी आवक और गेट पास का खुलासा हुआ। एसीबी ने दिसंबर 2025 में आरोपियों के खिलाफ धारा 120B, 409, 420, 467, 468, 471 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत केस दर्ज किया। हालांकि अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
हाल ही में दोनों विभागों में नए आईपीएस अधिकारियों की तैनाती हुई है। नरेंद्र बिजारणिया को एसपी करनाल और गंगाराम पूनिया को एसपी एसीबी नियुक्त किया गया है। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सक्रिय है, जबकि एसीबी की कार्रवाई धीमी प्रतीत हो रही है।
पुलिस ने बताया कि SIT सभी आरोपियों पर कड़ी नजर रखे हुए है और जांच पूरी होने के बाद आवश्यकतानुसार और गिरफ्तारी की जाएगी। जिले में जारी यह जांच दोनों विभागों की कार्रवाई और एसीबी की धीमी प्रतिक्रिया पर भी सवाल खड़ा कर रही है।