राहुल चावला, कांगड़ा-:ब्रेन और स्पाइन से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों और उनके आधुनिक उपचार विकल्पों को लेकर कांगड़ा में एक विशेष चिकित्सा जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर टांडा मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. अमित जोशी और स्पाइन विशेषज्ञ डॉ. अमित भारद्वाज ने भाग लेते हुए मीडिया से बातचीत की। विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सर्जरी के क्षेत्र में आई तकनीकी प्रगति ने उपचार को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है।
डॉ. जोशी ने बताया कि मस्तिष्क और रीढ़ से संबंधित रोगों के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। लगातार सिरदर्द, शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन या कमजोरी, चलने-फिरने में असंतुलन, बोलने या देखने में बदलाव और लंबे समय तक बना रहने वाला पीठ दर्द जैसे संकेतों पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और सही निदान से न केवल जटिलताओं को रोका जा सकता है, बल्कि उपचार की सफलता दर भी बढ़ाई जा सकती है।
विशेषज्ञों ने दी समय पर जांच की सलाह
विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में ब्रेन और स्पाइन रोगों के इलाज के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। शुरुआती चरण में दवाइयों और फिजियोथेरेपी के माध्यम से कंजर्वेटिव मैनेजमेंट किया जाता है। यदि आवश्यकता हो तो मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी और उन्नत ब्रेन सर्जरी तकनीकों का सहारा लिया जाता है। उपचार का चयन मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और रोग की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।डॉ. भारद्वाज ने कहा कि स्पाइन सर्जरी में अब पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में मिनिमली इनवेसिव तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इन तकनीकों से शरीर के ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है, रक्तस्राव कम होता है और मरीज को कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। इसके साथ ही रिकवरी अवधि भी पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।ब्रेन सर्जरी में भी नेविगेशन-गाइडेड और एंडोस्कोपिक तकनीकों के उपयोग से सर्जरी की सटीकता और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इन आधुनिक तरीकों से मस्तिष्क के संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित रखते हुए बेहतर परिणाम हासिल किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर चिकित्सा सलाह लेने की अपील की।