राहुल चावला, राहुल-:शाहपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर धारकंडी क्षेत्र की बोह घाटी, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है, अब प्रदेश के पहले ट्राउट हब के रूप में नई पहचान बनाने जा रही है। खबरू वाटरफॉल की कलकल ध्वनि, बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाएं और घने देवदार के जंगल इस क्षेत्र को पहले ही पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर चुके हैं। अब यहां ट्राउट उत्पादन को बढ़ावा देकर पर्यटन और आर्थिकी सशक्तिकरण को साथ जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
शाहपुर के विधायक एवं उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने बताया कि अपने पहले विधायक प्राथमिकता बैठक में उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह से धारकंडी क्षेत्र में ट्राउट हब स्थापित करने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री ने इसे बजट में शामिल करते हुए 3.03 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। अधिकांश निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और बोह में ट्राउट हैचरी तैयार है।इस परियोजना के तहत 3.03 करोड़ रुपये में से 211.50 लाख रुपये की विभिन्न योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें 34 ट्राउट रेसवेज, 6 मोटरसाइकिल आइस बॉक्स सहित और 2 फिश कियोस्क शामिल हैं। ट्राउट क्लस्टर के अंतर्गत 20 रेसवेज, 4 मोटरसाइकिलें और 1 फिश कियोस्क का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य प्रगति पर है। अब तक 88.50 लाख रुपये की उपदान राशि जारी की जा चुकी है।
मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक, पालमपुर, डॉ. राकेश कुमार के अनुसार धारकंडी घाटी ट्राउट पालन के लिए अत्यंत अनुकूल है। 15 से 20 स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर तालाब बनाकर उत्पादन आरंभ कर दिया है। नई हैचरी से गुणवत्तायुक्त ट्राउट बीज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा। इसके लिए डेनमार्क से उच्च नस्ल का बीज मंगवाया गया है।स्थानीय निवासी पप्पू राम ने अपनी पत्नी नीलम देवी के साथ 38 लाख रुपये की लागत से ‘बोह वैली फिश फार्म एंड हैचरी’ स्थापित की है। उन्हें 15 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मिली है। उन्होंने युवाओं से सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार अपनाने का आह्वान किया।यह ट्राउट हब बोह घाटी को केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे ग्रामीण समृद्धि, आत्मनिर्भरता और पर्यटन-आधारित अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।