मुंबई। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए मुंबई के डॉक्टरों ने 10 वर्षों से दृष्टिहीन 44 वर्षीय स्त्री रोग विशेषज्ञ की आंखों की रोशनी वापस लौटा दी है। गंभीर ग्लूकोमा और जटिल नेत्र रोगों के कारण वह पिछले एक दशक से लगभग पूरी तरह अंधत्व का सामना कर रही थीं।
डॉक्टरों के अनुसार मरीज की दाहिनी आंख की रोशनी पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी, जबकि बाईं आंख से केवल रोशनी का आभास होता था। पूर्व में कई सर्जरी के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ था। जांच के दौरान पाया गया कि बाईं आंख में लगा पुराना कृत्रिम लेंस (आईओएल) अपनी जगह से खिसक गया था, जिससे कॉर्निया और आइरिस को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था।
मुंबई स्थित डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल की सर्जिकल टीम ने इस जटिल मामले को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। विशेषज्ञों ने एक ही सत्र में कई उन्नत प्रक्रियाएं अपनाते हुए क्षतिग्रस्त लेंस को हटाया और नवीन तकनीक के माध्यम से नया लेंस प्रत्यारोपित किया। बताया जा रहा है कि इस तरह की बहु-स्तरीय जटिल सर्जरी का यह विश्व में पहला मामला है, जिसमें विभिन्न अत्याधुनिक तकनीकों का एक साथ उपयोग किया गया।
सर्जरी के बाद मरीज की बाईं आंख की दृष्टि 6/24 तक बहाल हो गई है, जिसे चिकित्सकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। रोशनी लौटने के बाद वह दोबारा अपनी मेडिकल प्रैक्टिस शुरू कर चुकी हैं और मरीजों की सेवा में लौट आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल भारतीय चिकित्सा जगत के लिए गर्व का विषय है, बल्कि गंभीर ग्लूकोमा और जटिल नेत्र रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद भी लेकर आई है।