मंडी, धर्मवीर-:देवभूमि हिमाचल के ऐतिहासिक शहर मंडी में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान एक बार फिर सांस्कृतिक विविधता की अद्भुत छटा देखने को मिली। छोटी काशी के नाम से विख्यात इस शहर में भव्य अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक परेड ने देश-विदेश की लोक परंपराओं को एक मंच पर लाकर अनूठा संगम प्रस्तुत किया। हजारों दर्शकों की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम ने महोत्सव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। पेश है विस्तृत रिपोर्ट।
देश-विदेश से आए 35 सांस्कृतिक दलों ने दी अपनी प्रस्तुतियां
सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के पांचवें दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या खास आकर्षण का केंद्र रही। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इंटरनेशनल कल्चरल परेड में इस बार 11 देशों सहित कुल 35 सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया। रंग-बिरंगी वेशभूषा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकनृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।विदेशी दलों में अर्जेंटीना, फ्रांस, अमेरिका, श्रीलंका, रूस, वेनेजुएला, नेपाल, कजाकिस्तान और कंबोडिया के कलाकार शामिल रहे। वहीं अफ्रीकी महाद्वीप से तंजानिया, नाइजीरिया, घाना, जिम्बाब्वे, लाइबेरिया, इस्वातिनी (स्वाजीलैंड), लेसोथो, कैमरून और दक्षिण अफ्रीका से आए कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से उत्सव में अंतरराष्ट्रीय रंग घोले। ढोल-नगाड़ों और लोकगीतों की गूंज के बीच पूरी परेड मार्ग पर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
इस भव्य आयोजन के लिए थपथपाई मंडी जिला प्रशासन की पीठ
कार्यक्रम का शुभारंभ हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हरी झंडी दिखाकर किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं और प्रदेश को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त माध्यम बताया।मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी से ही शिवरात्रि महोत्सव का स्वरूप पूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष शुरू की गई इस पहल को इस बार और व्यापक रूप दिया गया है। आयोजन की सफलता के पीछे प्रशासनिक टीम की महीनों की तैयारी और समर्पित प्रयास शामिल हैं।
देश के विभिन्न राज्यों से भी कलाकारों ने अपनी लोकसंस्कृति का प्रदर्शन किया। राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब, असम और मणिपुर के दलों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के शिमला, हमीरपुर, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, चंबा, किन्नौर और सिरमौर जिलों के कलाकारों ने भी मंच की शोभा बढ़ाई। मंडी जिला के पांच स्थानीय सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को स्थानीय परंपराओं से जोड़ने का कार्य किया।
विदेशी व देशी कलाकार
अमेरिका से आई हेनली, श्रीलंका से आए राघवन, रूस से आई कशिश और पंजाब से आए आशिष ने कहा कि मंडी आकर प्रस्तुति देना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि इस मंच के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों को जानने और समझने का अवसर मिला है, जिसे वे अपने देश और प्रदेश में साझा करेंगे।
सांस्कृतिक परेड ने यह साबित कर दिया कि विविधता में एकता की भावना आज भी जीवंत है। छोटी काशी की पहचान अब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सांस्कृतिक वैश्विक मंच के रूप में भी उभर रही है। अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के इस आयोजन ने एक बार फिर मंडी को विश्व पटल पर विशेष पहचान दिलाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।