नई दिल्लीI पश्चिम बंगाल की राजनीति के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार तड़के कोलकाता में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। साल्ट लेक स्थित एक निजी अस्पताल में रात करीब 1:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुकुल रॉय लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रमुख रणनीतिकार रहे। पार्टी के गठन के बाद संगठन को मजबूत करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, जिनमें दल-बदल और उससे जुड़ी कानूनी चुनौतियां भी शामिल रहीं।
सेहत बिगड़ने के बाद सक्रिय राजनीति से दूरी
पिछले कुछ वर्षों से खराब स्वास्थ्य के कारण वह सक्रिय राजनीति से दूर थे। वर्ष 2023 की शुरुआत में चिकित्सकों ने बताया था कि वह डिमेंशिया और पार्किंसंस जैसी बीमारियों से जूझ रहे थे, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता प्रभावित हुई थी।
मार्च 2023 में हाइड्रोसेफेलस के इलाज के लिए उनकी ब्रेन सर्जरी की गई थी। जुलाई 2024 में घर पर गिरने से सिर में गंभीर चोट लगी, जिसके बाद ब्लड क्लॉट हटाने के लिए एक और ऑपरेशन हुआ। इसके बाद उनकी सेहत लगातार गिरती चली गई। वह मधुमेह, सांस संबंधी दिक्कत और लगातार उच्च ब्लड शुगर स्तर से भी पीड़ित थे।
लंबा राजनीतिक सफर
मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और पार्टी नेतृत्व के करीबी माने जाते थे। वह संप्रग-2 सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री और जहाजरानी राज्य मंत्री रहे। 2006 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता की जिम्मेदारी निभाई।
वर्ष 2017 में मतभेदों के चलते उन्होंने भाजपा का रुख किया, जहां उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद वह पुनः तृणमूल कांग्रेस में लौट आए।
उनके निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है।