भिवाड़ी | भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के 11 दिन बाद एक और श्रमिक की मौत हो गई। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचाराधीन नाबालिग श्रमिक जुन्नू ने दम तोड़ दिया। वह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के हरिसिद्धि अंचल के मुरारपुर गांव का निवासी था। इस हादसे में अब मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो चुकी है।
यह विस्फोट गारमेंट जोन स्थित एक औद्योगिक प्लॉट में हुआ था। यह प्लॉट मूल रूप से कपड़ा फैक्ट्री के लिए आवंटित था, लेकिन वहां अवैध रूप से पटाखा निर्माण का कार्य चल रहा था। फैक्ट्री का गेट अंदर से बंद कर खतरनाक सामग्री के साथ उत्पादन किया जा रहा था। घटना के समय 20 से अधिक श्रमिक अंदर मौजूद थे। अचानक एक के बाद एक तीन धमाके हुए, जिसके बाद भीषण आग लग गई।
कुछ श्रमिक जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन 11 लोग अंदर फंस गए। सात श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। गंभीर रूप से झुलसे अनूप की पांच दिन पहले मौत हो चुकी थी और अब जुन्नू के निधन के साथ मृतकों की संख्या नौ पहुंच गई है।
प्रारंभिक प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि औद्योगिक क्षेत्र में कई अवैध इकाइयां किराये के भूखंडों के सहारे संचालित हो रही थीं। बाहरी व्यक्तियों के नाम पर लिए गए प्लॉट स्थानीय स्तर पर किराये पर देकर ऐसे खतरनाक कारोबार को अंजाम दिया जा रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े कई अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।
पुलिस ने इस मामले में फैक्ट्री के मुख्य संचालक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, लगातार बढ़ती मौतों के बीच यह सवाल तेज हो गया है कि औद्योगिक क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर अवैध और विस्फोटक गतिविधियां प्रशासनिक निगरानी से कैसे बचती रहीं।
यह घटना केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध संचालन के गंभीर खतरे की चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या सख्त कार्रवाई की जाती है।