लाहौल | हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में एक बड़ा हिमस्खलन हुआ, जब पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की ऊंची चोटी पर स्थित यानदे गंग ग्लेशियर का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आ गिरा। टूटे हुए हिमखंडों का मलबा चंद्रा नदी तक पहुंच गया। हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है।
जानकारी के अनुसार गोंदला क्षेत्र के सामने स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने इस हिमनद का एक बड़ा हिस्सा करीब ढाई बजे टूटकर नीचे आया। हिमस्खलन के साथ उठे बर्फीले गुबार और तेज हवा का असर चंद्रा नदी के पार बसे रालिंग, खंगसर, जांगला और मूर्तिचा गांवों तक महसूस किया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि एवलांच का मलबा सीधे नदी तक जा पहुंचा, जबकि बर्फीली हवा का प्रभाव दूर तक देखा गया।
गोंदला पंचायत के प्रधान सूरज ठाकुर ने बताया कि घाटी में मौसम बदलने के दौरान इस तरह की घटनाएं सामान्य मानी जाती हैं। हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद तापमान में बढ़ोतरी के कारण ग्लेशियर का एक हिस्सा अस्थिर हो गया था, जिसके चलते यह हिमस्खलन हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार टूटते हिमखंडों के कारण घाटी के ग्लेशियर धीरे-धीरे सिकुड़ रहे हैं, जो भविष्य में चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।
वहीं मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में फरवरी के महीने में सामान्य से 86 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जहां सामान्य रूप से 101.8 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, वहीं इस बार केवल 14.7 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश के अधिकांश जिलों में भी सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक 6 मार्च तक प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है।