धर्मशाला, राहुल-:हिमाचल प्रदेश के प्रमुख शहर धर्मशाला में मंगलवार को तिब्बत की आज़ादी की मांग को लेकर निर्वासित तिब्बतियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। तिब्बत राष्ट्र विद्रोह की 67वीं वर्षगांठ के अवसर पर मैक्लोडगंज से कचेहरी अड्डा तक एक विशाल रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय के लोगों के साथ विदेशी पर्यटकों ने भी भाग लिया।
यह प्रदर्शन तिब्बत से जुड़े विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा आयोजित किया गया था। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने तिब्बत की आज़ादी के समर्थन में नारे लगाए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि तिब्बत की स्वतंत्रता न केवल तिब्बती लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
रैली में शामिल प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र से तिब्बत मुद्दे पर न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की कि वह तिब्बत की आज़ादी के आंदोलन में सहयोग करे और चीन पर तिब्बत में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर दबाव बनाए।
तिब्बतियन वुमेन एसोसिएशन की अध्यक्ष शेरिंग डोलमा ने कहा कि तिब्बती समुदाय पिछले कई दशकों से अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री से अपील की कि जब भी वे चीन के दौरे पर जाएं, तो वहां के नेतृत्व के साथ तिब्बत के मुद्दे को अवश्य उठाएं। उन्होंने कहा कि तिब्बत एक अलग पहचान और संस्कृति वाला राष्ट्र है और उसकी स्वतंत्रता से पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।इस अवसर पर चुगलाखंग बौद्ध मंदिर परिसर में भी एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें दुनिया के करीब 32 देशों से आए तिब्बत समर्थक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान तिब्बत के समर्थन में आवाज उठाई गई और चीन की नीतियों की आलोचना की गई।
स्टूडेंट्स फॉर फ्री तिब्बत-इंडिया की नेशनल डायरेक्टर तेन्जिन पासंग ने कहा कि तिब्बत में चीन की दमनकारी नीतियों के कारण वहां के लोगों को लगातार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि तिब्बत की आज़ादी की मांग को लेकर अब तक लगभग 170 तिब्बती आत्मदाह कर चुके हैं।उन्होंने कहा कि तिब्बत का संघर्ष केवल तिब्बतियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकार, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शांति से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए विश्व समुदाय को इस मुद्दे पर गंभीरता से आगे आना चाहिए।