Summer Express , वॉशिंगटन । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्र के भीतर खदानें बिछाना शुरू कर दिया है। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह जलडमरूमध्य दुनिया में कच्चे तेल के परिवहन का बड़ा हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां बढ़ती गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर पड़ने लगा है।
अमेरिकी खुफिया सूत्रों के मुताबिक ईरान ने अब तक समुद्र में कुछ दर्जन खदानें बिछाई हैं, लेकिन खतरा इससे कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पास खदान बिछाने में सक्षम जहाजों और छोटी नौकाओं का बड़ा हिस्सा अभी भी सुरक्षित है। ऐसे में आवश्यकता पड़ने पर सैकड़ों और खदानें बिछाकर इस अहम समुद्री मार्ग को बाधित किया जा सकता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने तुरंत इन खदानों को नहीं हटाया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी सैन्य तंत्र भी सक्रिय हो गया है।
अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार राष्ट्रपति के निर्देश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कार्रवाई करते हुए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सक्रिय ईरानी खदान बिछाने वाले जहाजों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई में 16 खदान बिछाने वाले जहाजों सहित कई ईरानी नौसैनिक पोतों को नष्ट किए जाने का दावा किया गया है, ताकि इस महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सके।
वर्तमान में क्षेत्र की स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने चेतावनी दी है कि इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। इसके चलते इराक और कुवैत जैसे देशों का करीब 15 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और लगभग 4.5 मिलियन बैरल परिष्कृत ईंधन खाड़ी क्षेत्र में ही अटका हुआ है, क्योंकि निर्यात के वैकल्पिक मार्ग सीमित हैं।
इस तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है और कीमतें 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं। वहीं G7 देशों ने संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर विचार शुरू कर दिया है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उनके पास समुद्र में बिछाई गई खदानों का पता लगाने के लिए उन्नत तकनीक और उपकरण उपलब्ध हैं। हालांकि अभी तक अमेरिकी नौसेना ने व्यावसायिक जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू नहीं किया है, जिससे समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।