Summer Express , नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने देश में प्राकृतिक गैस के उपयोग की प्राथमिकताओं में बदलाव किया है। सरकार ने फैसला लिया है कि घरेलू रसोई गैस (एलपीजी), सीएनजी और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि घरों और परिवहन क्षेत्र में किसी प्रकार की कमी न आए।
इस संबंध में पेट्रोलियम मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नया आदेश जारी किया है। इसके तहत गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को मिलने वाली गैस का हिस्सा कम कर उसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर मोड़ा जाएगा। सरकार का कहना है कि देश में गैस की कुल उपलब्धता पर्याप्त है, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखना जरूरी हो गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार की पहली प्राथमिकता देश के लगभग 33 करोड़ घरेलू गैस कनेक्शनों तक नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से गैस टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत की गैस आपूर्ति का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है। इसी स्थिति को देखते हुए गैस आवंटन व्यवस्था में पुनर्गठन किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध एलएनजी का इस्तेमाल सबसे पहले एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। इन क्षेत्रों की औसत छह महीने की मांग को पूरी तरह पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद उर्वरक उद्योग को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां कम से कम 70 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक पश्चिम एशिया संकट के कारण रसोई गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया था। ऐसे में गैस आवंटन में बदलाव करते हुए रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त गैस फीडस्टॉक के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप पिछले दो दिनों में एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एलपीजी की मांग की समीक्षा के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम—के वरिष्ठ अधिकारियों की एक निगरानी समिति भी गठित की गई है। यह समिति विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाली गैस मांग का आकलन कर उसके आवंटन पर निर्णय लेगी।
सरकार ने गैस आपूर्ति के इस नए प्रबंधन को लागू करने की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी गेल लिमिटेड को सौंपी है, जो विभिन्न क्षेत्रों में गैस वितरण को प्राथमिकता सूची के अनुसार नियंत्रित करेगी। हालात सामान्य होने के बाद गैस आपूर्ति से जुड़े मूल वाणिज्यिक अनुबंध फिर से लागू कर दिए जाएंगे।
भारत में प्राकृतिक गैस की खपत करीब 19.1 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन है, जिसमें से लगभग आधी जरूरत आयातित एलएनजी से पूरी होती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है और कई क्षेत्रों से एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं।
तेल विपणन कंपनियों के निर्देश पर कई जगहों पर व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति पहले ही सीमित कर दी गई है। इस बीच बेंगलुरु से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन क्षेत्र के लिए भी एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में होटल और रेस्तरां उद्योग को व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति में कमी के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि इन शिकायतों की जांच की जा रही है और तेल कंपनियों को आपूर्ति व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही रसोई गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय भी बढ़ाया गया है।