Summer express/शिमला, संजू -:हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार की नीतियों, कार्यप्रणाली और तीन साल के कार्यकाल पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने भाषणों में लगातार केंद्र सरकार को कोस रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में परिस्थितियां अलग थीं। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार के पास जनता को बताने के लिए ठोस उपलब्धियां नहीं हैं और पूरा भाषण आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बीते चार साल में सरकार कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं कर पाई है। प्रदेश में नई योजनाओं का अभाव रहा और कई संस्थान बंद कर दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य पर कर्ज बढ़कर करीब 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, लेकिन इसके बावजूद विकास कार्य नजर नहीं आ रहे। ठेकेदारों को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार पर ठेकेदारों को खुश करने के आरोप लगाए जाते हैं, जबकि उस समय बनाए गए भवन जनता की मांग और विधायकों की सिफारिश पर बने थे। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जिन उद्देश्यों के लिए ये भवन बनाए गए थे, वर्तमान सरकार उन्हें पूरा क्यों नहीं कर रही और कई संस्थानों को बंद क्यों किया गया।
ऑडीआई अधिकारियों के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया जाना चाहिए था और यह भी सवाल उठाया कि विस्तार के बाद उन्हें जो जिम्मेदारियां दी गईं, क्या उन्होंने उन्हें ईमानदारी से निभाया।
राजनीतिक माहौल पर तंज कसते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वे किसी तनाव में नहीं हैं, बल्कि मुख्यमंत्री खुद चिंता में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर ही मंत्री यह कह रहे हैं कि सरकार बनने का श्रेय किसी और को जाता है, यहां तक कि उपमुख्यमंत्री की भूमिका को लेकर भी बयानबाजी हो रही है।
सदन में ड्रेस कोड के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। विपक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सादगी और भारतीय संस्कृति के अनुरूप परिधान पहनने चाहिए, जिससे अनुशासन झलकता है। साथ ही उन्होंने ड्रेस कोड से जुड़े नियम और कार्रवाई की भी स्पष्टता की मांग की। जयराम ठाकुर ने कहा कि ड्रेस कोड के संबंध में ज़्यादा कड़ाई की आवश्यकता नहीं है। अगर ड्रेस हिमाचली संस्कृति को दिखाते हों, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
विधायक निधि और विशेषाधिकार प्रस्ताव (Privilege Motion) का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष ने सरकार पर सदन में गलत जानकारी पेश करने का आरोप लगाया और कहा कि इस पर क्या कार्रवाई होगी, यह देखना होगा। सेवा विस्तार (Extension) के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए और कहा कि कई अधिकारियों को अनावश्यक रूप से विस्तार दिया जा रहा है, जो प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। कुल-मिलाकर विधानसभा सत्र में विपक्ष ने सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश की और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत दिए।