Summer express, जींद | देश की महत्वाकांक्षी हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना को एक बार फिर तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ा है। प्लांट में समय पर हाइड्रोजन गैस का उत्पादन नहीं हो पाने के कारण निर्धारित शेड्यूल के अनुसार ट्रेन को रवाना नहीं किया जा सका, जिससे सोनीपत रूट पर चल रहे ट्रायल पर असर पड़ा है।
पिछले चार दिनों से हाइड्रोजन ट्रेन का परफॉर्मेंस ट्रायल लगातार जारी है, जिसमें ट्रेन की गति, सुरक्षा और तकनीकी क्षमता का परीक्षण किया जा रहा है। लेकिन गैस आपूर्ति में आई रुकावट के चलते ट्रायल प्रक्रिया की गति धीमी हो गई है और शेड्यूल प्रभावित हुआ है।
जानकारी के अनुसार, हाइड्रोजन प्लांट में तकनीकी खामियों के कारण गैस उत्पादन सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चेन्नई से हाइड्रोजन गैस मंगवाकर ट्रेन में भरी जा रही है। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है, जिसके चलते ट्रेन को तय समय पर ट्रैक पर उतारना संभव नहीं हो पाया।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन ट्रेन अत्याधुनिक और नई तकनीक पर आधारित है, इसलिए शुरुआती चरण में इस प्रकार की तकनीकी चुनौतियां आना सामान्य बात है। विशेषज्ञों की टीम प्लांट की खामियों को दूर करने और गैस उत्पादन को स्थिर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि ट्रायल को बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सके।
फिलहाल, परियोजना से जुड़े अधिकारी ट्रायल को जल्द से जल्द पटरी पर लाने के प्रयास में जुटे हैं, ताकि भविष्य में हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित संचालन सुचारू रूप से शुरू किया जा सके।