Summer express, शिमला | हिमाचल प्रदेश सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचपीटीसी) की बसों में रियायती यात्रा के लिए आवश्यक ‘हिम बस कार्ड’ की सुविधा और इसके साथ जुड़ा शुल्क जारी रहेगा। सरकार ने कार्ड शुल्क वापस लेने के पक्ष में नहीं होने की जानकारी दी।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने कहा कि निगम ने अब तक हिम बस कार्ड के माध्यम से सेवा शुल्क के रूप में लगभग 4.72 करोड़ रुपये जुटाए हैं। पिछले वर्ष महिला यात्रियों को किराए में 50% छूट देने के कारण निगम पर लगभग 82.27 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय बोझ पड़ा है। उन्होंने बताया कि कार्ड प्रणाली जारी रखना जरूरी है क्योंकि यह महिला यात्रियों और बाहरी राज्यों की महिला यात्रियों के बीच भेदभाव को रोकने में मदद करती है।
उपमुख्यमंत्री ने विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों सुधीर शर्मा और विपिन सिंह परमार के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि छात्रों के लिए हिम बस कार्ड शुल्क माफ करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता देने के कांग्रेस के वादों को तुरंत लागू करना संभव नहीं है।
सुधीर शर्मा ने सुझाव दिया कि रियायती यात्रा में आधार कार्ड का उपयोग कर हिम बस कार्ड की आवश्यकता खत्म की जाए। इस पर अग्निहोत्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा ने पहले काला धन लौटाने और हर नागरिक को 15 लाख रुपये देने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ।
महत्वपूर्ण तिथियाँ:
हिम बस कार्ड अनिवार्य किया गया है और 31 मार्च 2026 तक वैध कार्ड के बिना रियायती और मुफ्त यात्रा का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार ने यह व्यवस्था महिला यात्रियों और अन्य राज्य से आने वाले यात्रियों के लिए समान रूप से लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम राज्य में सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।