शिमला, संजू: हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के आठ प्रमुख होटलों को ओएनएम (Operation & Maintenance) आधार पर निजी ऑपरेटरों को सौंपने का बड़ा फैसला लिया है। यह निर्णय निगम की मर्जी के खिलाफ है, जिसे लेकर निगम के अध्यक्ष आरएस बाली और कर्मचारी विरोध जता रहे हैं।
आरएस बाली ने बताया कि घाटे में चल रहे इन होटलों को रेनोवेशन की आवश्यकता थी और इसके लिए निगम ने सरकार से वित्तीय मदद मांगी थी। लेकिन सरकार ने कैबिनेट की बैठक में इन होटलों को निजी हाथों में देने का निर्णय लिया, जिसे अब निगम चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि निगम निजीकरण के पक्ष में नहीं है, लेकिन सरकार के निर्णय का पालन करना पड़ेगा।निगम के कर्मचारियों ने भी होटलों को निजी हाथों में देने का विरोध किया है। उनके अनुसार, पहले इन होटलों में निवेश कर उनके संचालन को बेहतर बनाया जा सकता था। इसके बावजूद सरकार ने निजी ऑपरेशन के माध्यम से होटलों को लाभदायक बनाने का रास्ता चुना है।आरएस बाली ने बताया कि नगरोटा बगवां बनेर खड्ड के किनारे 180 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का पहला बड़ा पांच-सितारा होटल बनाया जाएगा। यह एडीबी प्रोजेक्ट के तहत तैयार हो रहा है और इसमें प्रदेश का पहला म्यूजिकल फाउंटेन भी स्थापित किया जाएगा। इस होटल के लिए सबसे बड़ा टेंडर 6 अप्रैल को फाइनल किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में HPTDC की टर्नओवर लगातार बढ़ी है। 2021-22 में 78 करोड़ रुपये का टर्नओवर 2022-23 में 109 करोड़, 2023-24 में 105 करोड़ और 2024-25 में 107 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार पर 2000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, शिमला के हॉलिडे होम होटल में 45 करोड़ रुपये, मनाली के तीन होटलों में 20 से 35 करोड़ रुपये के रेनोवेशन कार्य चल रहे हैं। निगम ने BOD की बैठक में 24*7 कॉल सेंटर बनाने का भी निर्णय लिया है, जिससे पर्यटन सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।आरएस बाली ने कहा कि पर्यटन और रोजगार दोनों क्षेत्रों में इन होटलों के विकास से बड़ा फायदा होगा, लेकिन निगम की मर्जी के बिना लिया गया यह निर्णय कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगा।