Summer express, चेन्नई | तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य के साथ वित्तीय और अधिकारों के स्तर पर भेदभाव किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर एआईएडीएमके के महासचिव के. पलानीस्वामी एक बार फिर अपने गृह क्षेत्र एडप्पाडी से छठी बार चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं।
उदयनिधि स्टालिन ने पश्चिमी इरोड जिले के गोबिचेट्टीपलयम में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर राज्य को पर्याप्त धनराशि जारी न करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि शिक्षा क्षेत्र के लिए मंजूर लगभग 3,000 करोड़ रुपये की राशि अब तक जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य के अधिकारों को कमजोर कर रही है और वित्तीय आवंटन में अनदेखी कर रही है।
इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन से जुड़े केंद्र के प्रस्ताव का भी विरोध किया और कहा कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सबसे पहले इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत बताया।
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके महासचिव के. पलानीस्वामी एक बार फिर एडप्पाडी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। यह उनकी इस सीट से छठी चुनावी चुनौती होगी। वे अब तक 1989, 1991, 2011, 2016 और 2021 में इस क्षेत्र से जीत दर्ज कर चुके हैं।
पलानीस्वामी को इस सीट पर मजबूत जनाधार वाला नेता माना जाता है। हथकरघा, पावरलूम और ग्रेनाइट खनन जैसे क्षेत्रों पर आधारित यह विधानसभा क्षेत्र उनका पारंपरिक गढ़ रहा है।
इस बार उनका मुकाबला डीएमके उम्मीदवार सी. कासी और नाम तमिलर कात्ची की प्रियदर्शनी से माना जा रहा है, जिससे यहां त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है। कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला इन्हीं तीन प्रमुख दलों के बीच सिमटता नजर आ रहा है।
राज्य में 23 अप्रैल को मतदान होना है और जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक सरगर्मी और तेज होती जा रही है।