Summer express , तमिलनाडु | तमिलनाडु के विरुधुनगर स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद जांच में गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। इस हादसे में अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब रसायनों के मिश्रण के दौरान अचानक घर्षण से विस्फोट हो गया। धमाका इतना भीषण था कि फैक्ट्री के कई शेड पूरी तरह नष्ट हो गए। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि घायलों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी की जा रही थी। जहां एक कमरे में अधिकतम 3 से 4 मजदूरों की अनुमति होती है, वहां एक ही समय में लगभग 20 मजदूर काम कर रहे थे। इसके अलावा, सुरक्षा मानकों के अनुसार जिन कमरों को अलग-अलग और सुरक्षित दूरी पर होना चाहिए था, उन्हें एक-दूसरे से जोड़कर गोदाम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था।
फैक्ट्री में केवल दो आपातकालीन निकास द्वार पाए गए, जबकि नियमों के अनुसार कम से कम चार निकास द्वार होना अनिवार्य है। जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही अस्थायी रूप से रद्द किया जा चुका था, लेकिन इसके बावजूद मालिक ने इसे किराए पर देकर अवैध रूप से संचालन जारी रखा।
विस्फोट की भयावहता इतनी अधिक थी कि कई शव बुरी तरह जल गए, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। परिजन अस्पतालों के बाहर डीएनए रिपोर्ट और अन्य माध्यमों से अपने अपनों की पहचान का इंतजार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों के पीछे सबसे बड़ा कारण सुरक्षा नियमों का पालन न होना है। खतरनाक रसायनों का असुरक्षित मिश्रण, भंडारण में लापरवाही और तय क्षमता से अधिक मजदूरों को काम पर लगाना प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। साथ ही, कई जगहों पर उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरणों की कमी भी बड़े खतरे को जन्म देती है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि खतरनाक प्रक्रियाओं जैसे रसायन मिश्रण, भराई और पैकिंग को अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर किया जाए और आधुनिक मशीनों व सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।