Summer express/करनाल, 28 अप्रैल: बेहतर भविष्य के सपनों के साथ विदेश गया हरियाणा का एक युवा टेक्सस में हुए दर्दनाक अग्निकांड का शिकार हो गया। करनाल के असंध क्षेत्र के गांव गंगाटेहड़ी निवासी 22 वर्षीय सुखविंद्र सिंह की एक स्टोर में लगी भीषण आग में मौत हो गई। इस हादसे ने न सिर्फ उसके परिवार, बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
जानकारी के अनुसार, सुखविंद्र करीब चार साल पहले अवैध ‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका गया था। 12वीं तक पढ़े इस युवक को विदेश भेजने के लिए परिवार ने लगभग 50 लाख रुपये खर्च किए थे। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को उम्मीद थी कि सुखविंद्र विदेश में मेहनत कर हालात सुधारेगा। लंबे संघर्ष के बाद वह टेक्सस पहुंचा और एक स्टोर में काम करने लगा।
बताया जा रहा है कि जिस स्टोर में वह काम करता था, वहीं उसका रहने का भी इंतजाम था। दिनभर काम के बाद वह उसी जगह आराम करता था। 26 अप्रैल की सुबह काम खत्म करने के बाद वह स्टोर मालिक के साथ अंदर सो रहा था, तभी अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दोनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे अंदर ही फंस गए।स्टोर में काम करने वाला एक अन्य युवक उस दिन संयोगवश वहां मौजूद नहीं था। उसी ने घटना की जानकारी सबसे पहले परिवार और अन्य लोगों तक पहुंचाई। यदि वह भी मौके पर होता, तो हादसा और भी भयावह हो सकता था।घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सुखविंद्र और स्टोर मालिक दोनों की मौत हो चुकी थी। स्थानीय पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।
सुखविंद्र अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता शीशपाल खेतीबाड़ी करते हैं और परिवार में दो बहनें भी हैं। बेटे की मौत की खबर से परिवार पूरी तरह टूट गया है। घर में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।गांव गंगाटेहड़ी में भी शोक की लहर है। ग्रामीणों ने सुखविंद्र को मेहनती और शांत स्वभाव का लड़का बताया। गांव के सरपंच कुलदीप ने सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए और सुखविंद्र के शव को जल्द भारत लाने की व्यवस्था की जाए।यह घटना उन हजारों युवाओं की सच्चाई को उजागर करती है, जो बेहतर जीवन की तलाश में विदेश जाते हैं। सपनों की इस यात्रा में जोखिम भी कम नहीं होते, और कई बार हालात ऐसे मोड़ पर ले आते हैं, जहां से वापसी संभव नहीं होती।