3 July, 2025
मानसून की पहली बूँदें न सिर्फ राहत लाती हैं, बल्कि हरियाली बढ़ाने का सबसे बेहतरीन मौका भी देती हैं। बरसात का मौसम पौधारोपण के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है क्योंकि मिट्टी में नमी अधिक होती है, जिससे पौधे जल्दी जड़ पकड़ते हैं और आसानी से बढ़ते हैं।
इस मौके का फायदा उठाकर स्थानीय प्रशासन, स्कूल-कॉलेज, पर्यावरण प्रेमी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर पौधारोपण अभियान चला रहे हैं। शहर के कई हिस्सों में सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने भाग लिया।
पर्यावरणविदों की सलाह:
विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात में लगाए गए पौधे न सिर्फ पर्यावरण को स्वच्छ बनाते हैं, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकने, प्रदूषण कम करने और जलस्तर बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर नीम, पीपल, बरगद, अमलतास, गुलमोहर, सहजन, तुलसी और बांस जैसे पौधे वातावरण को शुद्ध करने में कारगर होते हैं।
जनभागीदारी की मिसाल:
कुछ कॉलोनियों और ग्रामीण इलाकों में तो स्थानीय लोगों ने खुद पौधों का इंतज़ाम कर ‘एक परिवार, एक पौधा’ जैसे अभियानों की शुरुआत की है। युवा और बुजुर्ग मिलकर पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी भी ले रहे हैं ताकि वे सिर्फ लगें नहीं, बल्कि लंबे समय तक जीवित भी रहें।
बरसात का मौसम हर साल आता है, लेकिन अगर हर साल हम एक पौधा भी लगाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, साफ़ पानी और ठंडी छांव की सौगात मिल सकती है। तो आइए, इस मानसून हम सब एक हरियाली की मुहिम में जुड़ें और प्रकृति को एक छोटा-सा लेकिन अनमोल तोहफा दें।