Summer express, झज्जर। विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में झज्जर के युवा मधुमक्खी पालक विनय फोगाट ने अपने अनोखे उत्पादों से सभी का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उनके स्टॉल पर प्रदर्शित ‘हनी विनेगर’ और ‘बी प्रोबायोटिक’ से खासे प्रभावित नजर आए। मुख्यमंत्री ने उत्पादों की तारीफ करते हुए उन्हें अपने साथ भी ले गए।
सेक्टर-1 स्थित कन्वेंशन सेंटर रेड बिशप में आयोजित इस कार्यक्रम में विनय फोगाट ने मधुमक्खी पालन से तैयार किए गए कई नवाचार उत्पादों का प्रदर्शन किया। स्टॉल पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने ‘शहद का सिरका’ देखकर उत्सुकता जताई और कहा कि उन्होंने इस तरह का उत्पाद पहले कभी नहीं देखा।
विनय फोगाट ने बताया कि ‘हनी विनेगर’ शुद्ध शहद को प्राकृतिक तरीके से लंबे समय तक किण्वित करके तैयार किया जाता है। यह सामान्य सिरके की तुलना में कम तीखा होता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, वजन नियंत्रित रखने तथा शरीर को डिटॉक्स करने में मददगार माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।
इसके अलावा ‘बी प्रोबायोटिक’ भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा। यह उत्पाद मधुमक्खियों की प्राकृतिक लार और शहद के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो शरीर में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में सहायक माना जाता है।
झज्जर जिले के मलिकपुर गांव निवासी विनय फोगाट आज आधुनिक मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में नई पहचान बना चुके हैं। उनके पास करीब 1100 मधुमक्खी कॉलोनियां हैं, जिनसे हर साल लगभग 38 से 40 टन शहद का उत्पादन किया जाता है।
विनय फोगाट ने बताया कि वे 18 प्रकार के अलग-अलग शहद और उससे जुड़े उत्पाद तैयार करते हैं। मौसम और फूलों की उपलब्धता के अनुसार वे अपने बी-फार्म को हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्थानांतरित करते रहते हैं।
उनके उत्पादों में सरसों, नीम, कीकर, शीशम, सूरजमुखी, सौंफ, जामुन और कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों का विशेष शहद शामिल है। इसके अलावा वे शहद से गुलकंद, हनी अर्क, बी प्रोपोलिस टिंक्चर और जोड़ों के दर्द के लिए विशेष जेल भी तैयार करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विनय फोगाट ने किसानों से रासायनिक खेती कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अत्यधिक कीटनाशकों के इस्तेमाल से मधुमक्खियों की संख्या तेजी से घट रही है, जबकि मधुमक्खियां फसलों में परागण बढ़ाकर उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करती हैं।