Summer express, बहादुरगढ़। महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी परिसर में सीवर टैंक की जहरीली गैस की चपेट में आने से प्लंबर सुनील की मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया है और यूनिवर्सिटी व हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने 1 करोड़ रुपये मुआवजा और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी जैसी स्थायी रोजगार व्यवस्था देने की मांग रखी है।
परिजनों का कहना है कि जब तक प्रबंधन की ओर से लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। घटना के बाद अस्पताल परिसर और इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, तीन दिन पहले यूनिवर्सिटी परिसर में सीवर सफाई के दौरान जहरीली गैस फैलने से पांच कर्मचारी उसकी चपेट में आ गए थे। इनमें हॉस्पिटल में प्लंबर के तौर पर कार्यरत सुनील की हालत सबसे गंभीर थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि सुनील को छुट्टी के दिन भी जबरन सीवर टैंक की सफाई के लिए बुलाया गया था। परिजनों का कहना है कि कर्मचारियों को किसी प्रकार के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसकी वजह से यह दर्दनाक हादसा हुआ। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद हॉस्पिटल प्रबंधन ने पीड़ित परिवार की कोई मदद नहीं की।
घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
इस मामले में महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल के पदाधिकारियों समेत आठ लोगों के खिलाफ सदर थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और जिम्मेदार लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है। फिलहाल हॉस्पिटल और यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।