Summer express/शिमला/संजू -:हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों के बीच राज्य सरकार ने जंगलों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट मैपिंग और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के माध्यम से अब जंगलों की निगरानी की जाएगी, जिससे वनाग्नि जैसी घटनाओं की समय रहते पहचान कर नुकसान को कम किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करेगी, बल्कि हरित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगी।
पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक एवं विशेष सचिव (आपदा प्रबंधन) डॉ. पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जंगलों की निगरानी पहले से अधिक प्रभावी होगी। एआई आधारित विश्लेषण और सैटेलाइट डेटा के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। इससे जंगलों में आग जैसी पारिस्थितिक आपदाओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने लोगों तक मौसम और आपदा संबंधी जानकारी समय पर पहुंचाने के लिए ‘आपदा रक्षक’ मोबाइल ऐप भी शुरू किया है। इस ऐप के माध्यम से मौसम का पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनी संदेश, आपदा अलर्ट और सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी रीयल-टाइम में उपलब्ध कराई जा रही है। शिमला स्थित कंट्रोल सेंटर से इसकी निगरानी की जा रही है, जबकि आम नागरिक भी अपने क्षेत्र में घटित किसी आपदा की सूचना सीधे सिस्टम तक पहुंचा सकते हैं।
डॉ. राणा ने बताया कि जंगलों में बड़ी मात्रा में गिरने वाली चीड़ की सूखी सुइयों को केवल आग का कारण मानने के बजाय औद्योगिक संसाधन के रूप में उपयोग करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इससे वनाग्नि के खतरे को कम करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। उनका कहना है कि आपदा प्रबंधन और आर्थिक विकास को साथ लेकर चलने वाला यह मॉडल भविष्य में प्रदेश की हरित अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।इस पहल में वैज्ञानिक संस्थानों का भी सहयोग लिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित निगरानी, सैटेलाइट मैपिंग और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से हिमाचल के जंगलों का संरक्षण अधिक प्रभावी होगा। साथ ही वैश्विक जलवायु वित्त तक पहुंच, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश नई संभावनाओं की ओर बढ़ सकेगा।