Summer express/पालमपुर , राहुल चावला-:पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने देश में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों और पशुओं की समस्या को गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि यह विषय कई बार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।उनका कहना है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की छवि पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।
शांता कुमार ने कहा कि देशभर में प्रतिदिन कुत्तों के काटने के हजारों मामले सामने आते हैं, जिससे आम लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।वहीं दूसरी ओर सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु दुर्घटनाओं और यातायात बाधाओं का कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की फसलें लगातार नुकसान झेल रही हैं और कई किसान खेती छोड़ने तक को मजबूर हो रहे हैं।उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि देश के छोटे और बड़े मंदिरों में मौजूद करोड़ों रुपये की संपत्ति का सदुपयोग किया जाना चाहिए। उनके अनुसार यदि मंदिरों को गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी दी जाए तो आवारा पशुओं की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो सकती है। इससे गायों को संरक्षण मिलेगा और मंदिरों की आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे।पूर्व मुख्यमंत्री ने नगर निगमों, नगर परिषदों और संबंधित सरकारी विभागों से मिलकर ठोस कार्ययोजना बनाने की अपील की। उन्होंने सरकार से आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान को तेज करने और उनके लिए अलग सुरक्षित स्थान निर्धारित करने की मांग भी उठाई।उन्होंने कहा कि जिस गाय को भारतीय संस्कृति में गौमाता का दर्जा दिया जाता है, उसका सड़कों पर कचरा खाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति है। शांता कुमार ने सरकार से इस दिशा में संवेदनशीलता के साथ ठोस कदम उठाने की अपील की।