हाई कोर्ट ने अशोक खेमका के पक्ष में सुनाया फैसला, केंद्र के आदेश रद्द

Karuna
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Summer express, चंडीगढ़। हरियाणा कैडर के चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के उन आदेशों को निरस्त कर दिया है, जिनके तहत उन्हें भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनलमेंट का लाभ देने से इंकार किया गया था।

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि समान परिस्थितियों में अन्य आईएएस अधिकारियों को नियमों में छूट देकर अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर का लाभ दिया गया, जबकि अशोक खेमका को इससे वंचित रखा गया। अदालत ने इसे संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार के विपरीत माना।

1991 बैच के आईएएस अधिकारी रहे अशोक खेमका को वर्ष 2010 में केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। बाद में उनके बैच के कई अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एंपैनलमेंट का लाभ मिला, लेकिन खेमका का नाम इस सूची में शामिल नहीं किया गया।

केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि खेमका ने केंद्र में उप सचिव या उससे वरिष्ठ पद पर न्यूनतम तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति पूरी नहीं की थी, इसलिए वे पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते। इस निर्णय को खेमका ने CAT में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि कई अधिकारियों को इसी शर्त में छूट देकर उच्च स्तर पर एंपैनल किया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान खेमका की ओर से ऐसे कई अधिकारियों के उदाहरण पेश किए गए, जिन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का आवश्यक अनुभव न होने के बावजूद अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। अदालत ने पाया कि केंद्र सरकार इन तथ्यों का संतोषजनक खंडन नहीं कर सकी।

अपने फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों में छूट देने का अधिकार होने के बावजूद यदि उसका लाभ अन्य अधिकारियों को दिया गया और एक समान स्थिति वाले अधिकारी को नहीं दिया गया, तो यह भेदभाव की श्रेणी में आता है।

हालांकि अदालत ने यह भी माना कि अशोक खेमका अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति का वास्तविक लाभ नहीं दिया जा सकता। बावजूद इसके, न्यायालय ने निर्देश दिया कि भविष्य में किसी आयोग, प्राधिकरण, ट्रिब्यूनल या अन्य संवैधानिक एवं प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के दौरान उन्हें अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर के एंपैनल अधिकारी के समकक्ष माना जाएगा।

इस फैसले के बाद अशोक खेमका को भविष्य में विभिन्न उच्च स्तरीय नियुक्तियों और अवसरों के लिए वही पात्रता और दर्जा मिलेगा, जो अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल अधिकारियों को प्राप्त होता है।

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