Summer express, चीन |चीन की बढ़ती उत्पादन क्षमता और सस्ते उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति अब कई देशों के लिए आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, यूरोप में चीनी वस्तुओं की लगातार बढ़ती आमद स्थानीय उद्योगों पर दबाव बढ़ा रही है, जिसके चलते यूरोपीय देशों में व्यापार असंतुलन को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में चीन की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि उसकी घरेलू खपत केवल 13 प्रतिशत के आसपास है। ऐसे में चीन अपने विशाल उत्पादन का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेज रहा है। सस्ती कीमतों पर उपलब्ध चीनी उत्पादों के कारण कई देशों के स्थानीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति केवल उपभोक्ता वस्तुओं तक सीमित नहीं है। चीन अब इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है। इससे यूरोपीय कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा और अधिक चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।
यूरोपीय संघ (EU) ने चीनी उत्पादों की बढ़ती आमद को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। वर्ष 2024 में चीन से आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। इसके बावजूद चीनी वाहन निर्माताओं का निर्यात लगातार बढ़ता रहा। रिपोर्टों के अनुसार, 2024-25 के दौरान चीन के वाहन निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भी व्यापार असंतुलन को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो यूरोप को अपनी आर्थिक और औद्योगिक सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।
इसी दिशा में यूरोपीय संघ स्टील आयात नीति में बदलाव की तैयारी कर रहा है। जुलाई से टैरिफ-फ्री स्टील कोटा में कटौती किए जाने की योजना है, जबकि आने वाले वर्षों में आयात शुल्क को और बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यूरोपीय स्टील उद्योग को सस्ते आयात के प्रभाव से बचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप अब ऐसी औद्योगिक और व्यापारिक नीतियों पर काम कर रहा है, जिनसे स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत किया जा सके और बाहरी बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता कम हो। आने वाले समय में यूरोपीय संघ चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से निपटने के लिए और भी सख्त व्यापारिक उपाय लागू कर सकता है।