Summer express, कुरुक्षेत्र |हरियाणा से गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी गुरुपर्व पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए रवाना हुआ 94 श्रद्धालुओं का जत्था वाघा बॉर्डर से ही वापस लौट आया। वीजा और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद अंतिम प्रशासनिक मंजूरी न मिलने के कारण श्रद्धालु सीमा पार नहीं कर सके। इस घटनाक्रम के बाद श्रद्धालुओं और सिख समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है।
श्रद्धालुओं का जत्था कुरुक्षेत्र स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही से अरदास के बाद पाकिस्तान के लिए रवाना हुआ था। जत्थे को गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी समागम में शामिल होने के साथ-साथ करतारपुर साहिब, डेरा साहिब और पंजा साहिब समेत कई पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन करने थे। हालांकि वाघा बॉर्डर पर पहुंचने के बाद उन्हें अंतिम अनुमति का इंतजार करना पड़ा, लेकिन दिनभर प्रतीक्षा के बावजूद मंजूरी नहीं मिल सकी।
जानकारी के अनुसार यात्रा से संबंधित कुछ जरूरी प्रशासनिक और दस्तावेजी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हो पाईं। इसके चलते गृह मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी और श्रद्धालुओं को पाकिस्तान जाने से रोक दिया गया। वहीं पंजाब और दिल्ली से पहुंचे अन्य जत्थों को सीमा पार करने की अनुमति मिलने की बात भी सामने आई है।
इस पूरे मामले को लेकर श्रद्धालुओं ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि आवश्यक मंजूरियां लंबित थीं तो उन्हें यात्रा के लिए रवाना नहीं किया जाना चाहिए था। लंबे इंतजार और अधूरी यात्रा के कारण श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे कई महीनों से इस पवित्र यात्रा की तैयारी कर रहे थे। खासकर बुजुर्गों और महिला श्रद्धालुओं में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। अब सिख समुदाय मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। फिलहाल इस मुद्दे पर संबंधित कमेटी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।