Summer express, नई दिल्ली। फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR-B) जमा योजनाओं को लेकर बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा इन जमाओं पर ब्याज दर की ऊपरी सीमा हटाए जाने के बाद कई बैंकों ने आकर्षक रिटर्न की पेशकश शुरू कर दी है, जिससे कुछ बैंक अपने एनआरआई ग्राहकों के दूसरे बैंकों की ओर रुख करने को लेकर चिंतित हैं।
बैंकिंग क्षेत्र के सूत्रों के मुताबिक, जिन बैंकों ने पहले ही FCNR (B) डिपॉजिट पर नई ब्याज दरों की घोषणा कर दी थी, वे अब RBI के ताजा फैसले के बाद अपनी रणनीति की समीक्षा कर रहे हैं। एक वरिष्ठ बैंकर ने कहा कि बदलते हालात को देखते हुए ब्याज दरों पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और मध्यम आकार के बैंक, जो पहले नियामकीय सीमा के कारण प्रतिस्पर्धा में पीछे थे, अब अधिक ब्याज दरों की पेशकश कर सकते हैं। वहीं बड़े बैंक फिलहाल ब्याज दरों को सीमित दायरे में रखने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
रेटिंग एजेंसी ICRA के वाइस प्रेसिडेंट सचिन सचदेवा के अनुसार, अधिकांश बैंकों ने पहले ही FCNR जमा पर ब्याज दरों में उल्लेखनीय वृद्धि कर दी है। ऐसे में आगे दरों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना सीमित नजर आती है।
समय से पहले जमा तोड़ने की आशंका
कुछ बैंकों को इस बात की भी चिंता है कि मौजूदा ग्राहक अपनी FCNR (B) जमाओं को समय से पहले बंद कर अधिक ब्याज देने वाले बैंकों में निवेश कर सकते हैं। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ग्राहकों को इससे बड़ा नुकसान नहीं होता है तो ऐसी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
विदेशी पूंजी आकर्षित करने की कोशिश
RBI ने बुधवार को चुनिंदा नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल (NRE) और FCNR (B) जमा योजनाओं पर ब्याज दर की सीमा अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया था। इस कदम का उद्देश्य बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने में अधिक लचीलापन देना और देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा देना है। माना जा रहा है कि इससे भारत के बाहरी क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।