नई दिल्ली | भारत को 2026 में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला है, जो देश के आर्थिक विकास, नवाचार और बहुपक्षीय सहयोग में वैश्विक नेतृत्व को एक बार फिर रेखांकित करेगा। यह घोषणा देश के लिए एक और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि मानी जा रही है।
ब्रिक्स कृषि परिषद के अध्यक्ष और पंजाब से राज्यसभा सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने इस अवसर पर खुशी जताते हुए कहा कि “भारत दक्षिण की आवाज़ बनकर उभरा है और उसकी प्रतिष्ठा वैश्विक मंचों पर लगातार मजबूत हो रही है। जी20 की तरह ही यह शिखर सम्मेलन भी भारत को समावेशी विकास मॉडल और रणनीतिक नेतृत्व को प्रस्तुत करने का सुनहरा मौका देगा।”
डॉ. साहनी ने हाल ही में ब्राजील में संपन्न ब्रिक्स 2025 शिखर सम्मेलन का हवाला देते हुए कहा कि भारत को वहां बड़ी कूटनीतिक सफलताएं मिलीं। इनमें पहुलेगाम आतंकी हमले और सीमा पार आतंकवाद की निंदा, साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए चीन और रूस समेत सभी ब्रिक्स देशों का समर्थन, उल्लेखनीय है।
खाद्य और आपूर्ति श्रृंखला पर भारत की चिंताओं को मिली जगह
ब्रिक्स कृषि परिषद के अध्यक्ष के रूप में डॉ. साहनी ने बताया कि शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स अनाज विनिमय के मुद्दे को प्राथमिकता दी गई और खाद्य, ईंधन और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला पर भारत की चिंताओं को सम्मिलित किया गया, जो भविष्य के लिए उत्साहजनक संकेत है।
डिजिटल इंडिया की वैश्विक सराहना
डॉ. साहनी ने कहा कि सम्मेलन में एआई गवर्नेंस, यूपीआई, डिजिटलीकरण और फिनटेक इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में भारत के नेतृत्व की खुलकर सराहना की गई। साथ ही, ब्रिक्स स्टार्टअप फोरम में भारत की भूमिका और स्टार्टअप नॉलेज हब के शुभारंभ को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
भारत को मिला COP33 के लिए समर्थन
उन्होंने यह भी बताया कि भारत के लिए यह एक और बड़ी उपलब्धि है कि सभी ब्रिक्स देशों ने वर्ष 2028 में होने वाले COP33 (जलवायु परिवर्तन सम्मेलन) की मेजबानी के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया है।
भारत की 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी स्थिति को और मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक मुद्दों पर नेतृत्व देने का अवसर भी प्रदान करेगी।